शनिवार, 7 दिसंबर 2013

झांसे में दुष्कर्म !

                            कई दिनों से मैं एक ही तरह के मामले  पेपर में पढ़ रही हूँ -- झांसे में रखकर दुष्कर्म ! जैसा कि इस शीर्षक से ही पता चल रहा है कि किसी पुरुष द्वारा नारी को किसी बात के प्रलोभन लेकर उसका यौन उत्पीड़न किया और  होती रही क्योंकि जब तक  ये आशा थी कि उसको इसके बाद जरूर लाभ मिलेगा . वह लाभ नौकरी , पैसे , विवाह  या फिर किसी मामले को सुलझाने के लिए किसी की सहायता लेने के रूप में हो सकता है , तब तक वह सामने वाले के इशारों पर चलती रहती है और अगर उसका लाभ नहीं  मिल  पाया तो वह क़ानून का सहारा लेने के लिए पहुँच जाती है।  जबकि वास्तव में इस शोषण के लिए वह खुद जिम्मेदार होती है।

                   इस काम के लिए कभी हमने ये सोचा है कि क्या सिर्फ एक पक्ष दोषी है ? नहीं पुरुष अगर दोषी है तो पीड़िता भी उतनी ही दोषी है क्योंकि आप अपने को  प्रस्तुत करती हैं ताकि आपका काम बन सके और जब नहीं बना तो आपने उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया।  मामला दर्ज कराना आपका पूरा हक़ है लेकिन उससे पहले एक नारी होने के नाते आप अपनी अस्मिता का मोल नहीं जानती या फिर आप अपने नैतिक मूल्यों से वाकिफ नहीं है।  अगर आप अपने को प्रयोग करने के लिए स्वयं प्रस्तुत कर रही है और काम न होने पर मामला उठा रही हैं तो एक नारी वर्ग भी ऐसा है जो आपको दोषी मानता है।  अगर कोई आपको आश्वासन दे रहा है और आपसे कुछ चाहता है तो वह ईमानदार बिलकुल नहीं हो सकता है , उस पर भरोसा करके आप उस रास्ते पर मत जाइये जहाँ पर आपके  जीवन को प्रभावित करने वाली स्थितियां उपस्थित हों।  वह  भरोसेमंद कैसे हो सकता है , जो काम के बदले में होने के पहले आपका शोषण करना चाहता है।  
                  आप लालच में या फिर धोखे में अपने मूल्यों से समझौता मत कीजिये।  आप काबिल है और उसके अनुरूप आपको नौकरी नहीं मिल रही है तो दूसरे के झांसे में मत आइये।  आपको काबिलियत के अनुरूप न सही नौकरी तो अपने मेहनत और प्रयास से मिलेगी जरूर और आप सिर  उठा कर काम कर सकती हैं।  बिना किसी लालच के अगर कोई सहायता करता भी है तो लोग अंगुली उठाने लगते ,फिर ऐसी स्थिति में आप स्वयं कैसे बच सकती हैं ? नौकरी के लिए अगर कोई पैसे मांगता है और आप उसके बदले कुछ और देने की बात करती हैं तो आप बराबर की दोषी कहीं जाएंगी फिर आप भले ही क़ानून का सहारा लें लेकिन अपना सम्मान खो देती हैं।  
                   विवाह का झांसा भी आपको ही दोषी बनता है क्योंकि विवाह सम्बन्ध की अपनी एक मर्यादा होती है और अगर सामने वाला ईमानदार है तो वह आपका फायदा उठाने की बात कर ही नहीं सकता है और करता भी है तो फिर आप उसको ईमानदार नहीं समझ सकती हैं फिर भी अगर आप अपने निर्णय को उसके अनुरूप ढाल लेती हैं तो फिर उसमें कोई और दोषी हो ही नहीं सकता है।  ऐसा नहीं है कि इस तरह से सिर्फ मजबूर लोग ही काम करते हैं बल्कि आधुनिकता के रंग में रंगे लोग भी इसको बहुत सामान्य मान कर एक अलग ही रौ में बहने लगते हैं और धोखा खाने पर क़ानून की शरण में।  क़ानून अपना काम जरूर करेगा लेकिन इन सब के बाद आप स्वयं  अपनी दृष्टि में ईमानदार साबित नहीं होती है।  
                    झांसे से सदैव बचें चाहे कितना ही नजदीकी इंसान हो , रिश्तेदार हो या फिर प्रतिष्ठित व्यक्ति हो।  पिछले एक साल से दामिनी काण्ड के बाद ऐसे मामले दर्ज करने का साहस नारी जाति  में आने लगा है और उनकी सुनवाई भी होने लगी है लेकिन इसके दुरूपयोग के भी पूरे पूरे अवसर सामने आने लगे हैं।  अपनी सोच को सजग और ईमानदार बनायें और सिर उठा कर जीने का संकल्प लें।