ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.
शनिवार, 27 मार्च 2010
गुरुवार, 25 मार्च 2010
शनिवार, 20 मार्च 2010
रविवार, 7 मार्च 2010
शुक्रवार, 5 मार्च 2010
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009