मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

शनिवार, 27 मार्च 2010

अर्थ पावर !

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आज सुबह अखबार हाथ में आया तो नजर पड़ी 'अर्थ पावर' का सन्देश मिला - कुछ गिने चुने शहरों में आज रात ८:३० से ९:३० के बीच सभी अपने घरों म...
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गुरुवार, 25 मार्च 2010

वह मूक कान्तिकारी - गणेश शंकर विद्यार्थी !

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                       आज २५ मार्च उनकी पुण्य तिथि है. वह खामोश क्रांतिकारी  - बहुत शोर शराबे से नहीं बने थे. उन्हें मूक क्रांतिकारी क...
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शनिवार, 20 मार्च 2010

युवा पीढ़ी अपराध में लिप्त क्यों?

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                      इस बात से सभी वाकिफ हैं की आज की युवा पीढ़ी अगर बहुत कुशाग्र नहीं है तो उसका रुख अपराधों की ओर अधिक हो रहा है? बैक पर स...
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रविवार, 7 मार्च 2010

कानपूर का गंगा मेला!

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     कानपुर में होली कुछ और ही रंग में रंगी होती है. होली वाले दिन के बाद अनुराधा नक्षत्र में गंगा मेला के नाम से होली मनाई जाती है. बि...
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शुक्रवार, 5 मार्च 2010

आई आई टी स्वर्ण जयंती वर्ष

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आई आई टी कानपुर अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में  ऐसे शिलालेख तैयार किया  है जिससे कि आने वाले समय में अगर ये दुनिया किसी तरह से रसातल में जाती है...
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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

आनर किलिंग !

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"ऑनर किलिंग" इस नए शब्द का प्रादुर्भाव कुछ ही समय पहले हुआ है लेकिन यह जुड़ा नारी से ही है क्योंकि "नारी" ऑनर का प्रतीक ह...
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गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009

मानव अमर होने वाला है!

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एक दिन पहले ही पढ़ा कि कुछ ही वर्षों के शोध के बाद मानव अमर हो जाएगा। बड़ी खुशी हुई कि अब तो न ईश्वर , न प्रकृति और न ही नश्वरता के दर्...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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