मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

पृथ्वी दिवस आज है !

›
आज पृथ्वी दिवस है - २२ अप्रैल !  ये जीवन दायिनी धरती माँ हमें सब कुछ देती रही है और आज भी दे रही है. लेकिन जब हम उसके पास कुछ बचने दें. उस...
5 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 21 अप्रैल 2010

झंडा ऊँचा रहे हमारा!

›
    तिरंगा - एक तीन रंग के कपड़े के टुकड़ों से बना और उस पर एक चक्र.                   राष्ट्रीय त्योहारों पर बड़ी शान से फहराया जाता है ...
3 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

अपने घर में दें प्रमाण!

›
         अ   आ इ ई उ ऊ ए ई ओ औ अं अः   ( मैं राष्ट्र भाषा हूँ) जिस घर में हम रहते हैं, जिस घर में हम पैदा हुए और जिस घर की पहचान...
5 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

क़ानून की ढाल तले अति - ये कैसा क़ानून !

›
                               क़ानून अंधा होता है - उसको सबूत चाहिए. ये हम रोज सुना करते हैं लेकिन एक ऐसा भी क़ानून बना है जिसमें किसी सबू...
9 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 27 मार्च 2010

अर्थ पावर !

›
आज सुबह अखबार हाथ में आया तो नजर पड़ी 'अर्थ पावर' का सन्देश मिला - कुछ गिने चुने शहरों में आज रात ८:३० से ९:३० के बीच सभी अपने घरों म...
6 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 25 मार्च 2010

वह मूक कान्तिकारी - गणेश शंकर विद्यार्थी !

›
                       आज २५ मार्च उनकी पुण्य तिथि है. वह खामोश क्रांतिकारी  - बहुत शोर शराबे से नहीं बने थे. उन्हें मूक क्रांतिकारी क...
10 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 20 मार्च 2010

युवा पीढ़ी अपराध में लिप्त क्यों?

›
                      इस बात से सभी वाकिफ हैं की आज की युवा पीढ़ी अगर बहुत कुशाग्र नहीं है तो उसका रुख अपराधों की ओर अधिक हो रहा है? बैक पर स...
3 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.