मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

सोमवार, 31 मई 2010

मेरा लेखन का सफर : स्मृतियाँ कुछ तिक्त कुछ मधुर !

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                            जब ब्लॉग तक पहुंची हूँ, तो मन हुआ कि संस्मरण की एक श्रृंखला जो यादों में बसी है और मेरे लेखन से जुड़ी है सब से ...
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रविवार, 30 मई 2010

31 मई तम्बाकू निषेध दिवस !

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                                    आज तम्बाकू निषेध दिवस - हर वर्ष आता है और हर वर्ष इसी तरह से चला जाता है, लोग अखबार में आलेख देखते हैं ...
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बुधवार, 26 मई 2010

जहाँ डाल डाल पर सोने की............... !

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 जहाँ  डाल डाल पर  सोने  की  चिड़ियाँ करती हैं  बसेरा  ..............         इस सोने की चिड़िया वाले देश में अब इंसान माटी के मोल बिक रह...
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गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

पृथ्वी दिवस आज है !

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आज पृथ्वी दिवस है - २२ अप्रैल !  ये जीवन दायिनी धरती माँ हमें सब कुछ देती रही है और आज भी दे रही है. लेकिन जब हम उसके पास कुछ बचने दें. उस...
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बुधवार, 21 अप्रैल 2010

झंडा ऊँचा रहे हमारा!

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    तिरंगा - एक तीन रंग के कपड़े के टुकड़ों से बना और उस पर एक चक्र.                   राष्ट्रीय त्योहारों पर बड़ी शान से फहराया जाता है ...
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गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

अपने घर में दें प्रमाण!

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         अ   आ इ ई उ ऊ ए ई ओ औ अं अः   ( मैं राष्ट्र भाषा हूँ) जिस घर में हम रहते हैं, जिस घर में हम पैदा हुए और जिस घर की पहचान...
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मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

क़ानून की ढाल तले अति - ये कैसा क़ानून !

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                               क़ानून अंधा होता है - उसको सबूत चाहिए. ये हम रोज सुना करते हैं लेकिन एक ऐसा भी क़ानून बना है जिसमें किसी सबू...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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