मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

सांसदों की वेतन वृद्धि : कितना उचित?

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                          सांसदों के वेतन और भत्ते में वृद्धि - एक अहम् मुद्दा जिसे संसद में फिलहाल टाल दिया गया है. बाकी मुद्दे पीछे हैं, ...
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सोमवार, 26 जुलाई 2010

क़ानून और हम!

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        बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मुकदमे के फैसले में अपना फैसला दिया कि "शादी का झूठा वादा  करके यौन सम्बन्ध बनाना  बलात्कार नहीं है....
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शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

मेरा सफरनामा (नासिक) !

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               अब हमारी बारी थी नासिक को घूमने की. हमारी पहली ही यात्रा थी तो यहाँ के दर्शनीय स्थलों  से हम अधिक परिचित न थे लेकिन हमारे टैक...
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शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

ये मौत के सौदागर!

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            वह कथोक्ति है न कि जो दूसरों के लिए कुआँ खोदता है ईश्वर उनके लिए खाई खोद कर तैयार कर देता है. लेकिन  ये कहावतें त्रेता , द्वापर ...
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गुरुवार, 8 जुलाई 2010

मेरा सफरनामा (शनि शिंगुनापुर)

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               त्रयम्बकेश्वर से चल कर हम अपनी नयी मंजिल की ओर बढे तो चले वापस नासिक रोड और वहाँ से टैक्सी  करके चल दिए अहमदनगर के सीमा में प...
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बुधवार, 30 जून 2010

मेरा एक सफरनामा (त्रयम्बकेश्वर मंदिर) !

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                                              ऐसी सफर और सैर मैंने परिवार और कुछ आत्मीय लोगों के साथ शायद पहली बार की और उसको पूरा पूरा एन्...
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सोमवार, 21 जून 2010

उ. प्र. में बी टी सी का यथार्थ !

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                             आजकल मैं भी और माँओं  की तरह से वर की खोज करने में लगी हूँ और जब भी अखबार का matrimonial देखती हूँ. तो खासतौर ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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