ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.
बुधवार, 29 सितंबर 2010
सोमवार, 27 सितंबर 2010
शुक्रवार, 24 सितंबर 2010
सोमवार, 20 सितंबर 2010
शुक्रवार, 17 सितंबर 2010
बुधवार, 15 सितंबर 2010
शुक्रवार, 10 सितंबर 2010