ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.
शुक्रवार, 28 जनवरी 2011
शुक्रवार, 21 जनवरी 2011
मंगलवार, 11 जनवरी 2011
रविवार, 9 जनवरी 2011
रविवार, 19 दिसंबर 2010
बुधवार, 17 नवंबर 2010