मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

स्वतंत्रता के योद्धा : लाला लाजपत राय !

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                                 हम स्वतंत्रता में ही पैदा हुए और उसकी खुली हवा में सांस ली. गुलामी कि घुटन और जुल्म की  छाया भी तो हमने ...
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शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

मित्र बनाओ बनाम ...........!

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१.   शक्ति फ्रेंडशिप मेक नाइस/सोबर लेडीज/जेंट्स फ्रेंड एंड  अर्नमनी इन इण्डिया /एब्रोड डाइरेक्ट एड्रेस और टेलीफ़ोन न. संपर्क करें --------- ...
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मंगलवार, 11 जनवरी 2011

चुनाव आयोग की नजर में प्रत्याशिता !

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        हमारा चुनाव आयोग अपनी सीमा में रहते हुए चुनावों की शुचिता को बनाये रखने के लिए वर्षों से प्रयत्नशील है. इस दिशा में सबसे अधिक सख्त औ...
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रविवार, 9 जनवरी 2011

मिड-लाइफ क्राइसिस !

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                                                     मिड-लाइफ क्राइसिस !                          वह  (मनु) मेरे पास आई थी अपने बारे में कुछ...
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रविवार, 19 दिसंबर 2010

संसद के कारनामे !

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                      प्रजातंत्र में संसद देश के नीति निमार्ण और देश के शासन का  आधार होती है और सम्पूर्ण राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी सांसद...
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बुधवार, 17 नवंबर 2010

बड़े घराने बनाम सरकार !

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   जब रतन टाटा ने घूस माँगने के मामले का खुलासा किया तो सरकार के कान खड़े हो गए और तुरंत ही सरकार नतमस्तक हो गयी. उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटे...
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सोमवार, 8 नवंबर 2010

सामाजिक दायित्व और आप !

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                    फिल्मों में दिखाए जाने वाले स्टंट आज के युवाओं को कितना आकर्षित कर रहे हैं , इस विषय में कई बार खबरें मिल चुकी हैं. कुछ ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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