मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

मुझे शर्म आती है...........

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ह मारी आजादी में बसे सपनों को सजाने वाले माली सजाते सजाते चले गए और जब फूल महके औ र उनकी खुशबू हम ले रहे हैं । बहुत ...
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गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

निर्वासन का दर्द है प्रवासी भारतीय साहित्‍य की पहचान - राजेन्‍द्र यादव

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नुक्कड़ के साभार .  यमुनानगर।   निर्वासित   होने   का   दर्द   हम   सबके   भीतर   बना   रहता   है।   दिल्ली   भी प्रवासियों   का   शहर   ...
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रविवार, 6 फ़रवरी 2011

मूलाधिकारों को चुनौती !

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                                                                              हमारे संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गयी है. उसके...
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शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

दूरस्थ शिक्षा में छेद !

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                        दूरस्थ शिक्षा एक बहुत अच्छे उद्देश्य को लेकर आरम्भ की गयी थी. हमारे देश के एक वर्ग की आर्थिक स्थिति और उसके शिक्ष...
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शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

कन्या त्याज्य है तो क्यों?

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                                                    कई घटनाएँ एक सुदृढ़ और विचारणीय विषय को जन्म देती हैं. आज सुबह ही खबर पढी - नवप्रसूत...
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शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

स्वतंत्रता के योद्धा : लाला लाजपत राय !

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                                 हम स्वतंत्रता में ही पैदा हुए और उसकी खुली हवा में सांस ली. गुलामी कि घुटन और जुल्म की  छाया भी तो हमने ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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