ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.
शनिवार, 26 फ़रवरी 2011
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011
रविवार, 6 फ़रवरी 2011
शनिवार, 5 फ़रवरी 2011
शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011