मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

गुरुवार, 31 मार्च 2011

मीना कुमारी के पुण्यतिथि पर !

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आज ३१ मार्च एक अदाकारा और एक शायरा की पुण्यतिथि पर मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि। आज मीना कुमारी की पुण्यतिथि है , वह बीते ...
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बुधवार, 30 मार्च 2011

कौन बीमार दवा किसकी? (२)

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सिर्फ एक पक्ष देख लेने भर से ही तो जीवन में महत्वपूर्ण निर्णय नहीं किये जा सकते हैं । पत्नी के बाद मैंने पति का भी ...
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सोमवार, 28 मार्च 2011

कितने अर्थ आवर !

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'अर्थ आवर' का पूरे विश्व में आह्वान किया गया और मीडिया ने चंद अँधेरे बंगलों को कैद करके दिखा दिया की हमने 'अर्थ आवर' में अँध...
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शनिवार, 26 मार्च 2011

कौन बीमार औ' दवा किसकी?

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                                            कौन बीमार औ' दवा किसकी?                        वह दंपत्ति  नीला के पास आया था और उनके प...
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सोमवार, 7 मार्च 2011

महिला दिवस (8 March)

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महिला दिवस सिर्फ एक वो दिन है जब की अखबारों में समाजसेवी संस्थाएं और हमारे ब्लॉग जगत में नए नए...
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शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

मुझे शर्म आती है...........

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ह मारी आजादी में बसे सपनों को सजाने वाले माली सजाते सजाते चले गए और जब फूल महके औ र उनकी खुशबू हम ले रहे हैं । बहुत ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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