मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

शनिवार, 20 अगस्त 2011

हमारा बैंक : स्विस बैंक !

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स्विस बैंक में संचित धन का खुलासा विकीलीक्स पहले ही कर चुका है और इससे सभी लोग वाकिफ होंगे , फिर भी एक बानगी देखें और विचार करें कि इन धन कु...
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सोमवार, 15 अगस्त 2011

स्वतंत्रता दिवस पर भारी अन्ना का आन्दोलन !

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स्वतंत्रता दिवस मनाया गया लेकिन उससे अधिक लोगों में उत्साह है अन्ना का साथ देने में।आज़ादी के जुलूस तो निकले लेकिन उससे अधिक रैली अन्ना के स...
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शनिवार, 6 अगस्त 2011

मित्रता दिवस !

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मित्रता दिवस मित्रता हो तो ऐसे ...
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गुरुवार, 4 अगस्त 2011

ऐसे होते हैं भगवान ?

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चिकित्सा क्षेत्र के सभी लोग एक विशेष महत्व रखते हैं और डॉक्टर तो भगवान कहे जाते हैं और होते भी हैं । ...
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बुधवार, 3 अगस्त 2011

किशोर वय और आप !

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ये हर माता - पिता को पता है कि किशोरावस्था बच्चों के जीवन का वह नाजुक दौर होता है जो उन्हें बना और बिगड़ दोनों सकता ह...
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शनिवार, 23 जुलाई 2011

सी बी आई की उपयोगिता !

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अपने रोज रोज के खुलते जा रहे काले कारनामो के तले दबी हमारी केंद्र सरकार अपनी बौखलाहट निकालने की सोच रही थी । कई ...
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गुरुवार, 14 जुलाई 2011

गर्मियों की छुट्टिय और अपना बचपन (२२)

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घर , परिवार और सामाजिक दायित्वों के बोझ तले दब कर कलम भी रुक गयी और फिर हमारी ये संस्मरणों कि यात्रा भी पड़ाव के लिए मजबूर हो गयी. ये तो सब ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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