मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

सोमवार, 30 जनवरी 2012

चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष के वे दिन !

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जिन्दगी वह महा समर है जिसको जीतने के लिए शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने जीवन में संघर्ष न किया हो । ऐसा नहीं इसके कुछ अ...
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रविवार, 29 जनवरी 2012

गाँधी जी के लिए !

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हम ही उन्हें महात्मा गाँधी नहीं कहते थे , वे सम्पूर्ण विश्व के लिए एक प्रेरणा स्रोत थे और सम्पूर्ण विश्व को उनकी हत्या ने हिला दिया था। इस...
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शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

वसंत पंचमी !

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        वाणी पुस्तक वीणा हस्ते , विद्या देवी तुम्हें नमस्ते ! आज का दिन माँ सरस्वती के प्रकट होने का दिन कहा जाता ...
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बुधवार, 25 जनवरी 2012

राष्ट्रीय मतदाता दिवस !

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" हम भारत के नागरिक , लोकतंत्र में अपनी पूर्ण आस्था रखते हुए यह शपथ लेते हें कि हम अपने देश की लोकतांत्रिक परम्परा...
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रविवार, 22 जनवरी 2012

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस !

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       .....नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर उनको शत शत नमन करते हुए कुछ लिखने का मन हुआ। उन्हें देश की आज़ादी में अलग ढंग से लड़ाई...
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मंगलवार, 17 जनवरी 2012

इगो : एक मनोरोग !

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परसों के "दैनिक जागरण" में एक खबर पढ़ी थी - "पति ने "सॉरी" नहीं कहा तो गर्भवती ने आग लगा ली" पढ़ा और उसकी तस्वी...
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सोमवार, 16 जनवरी 2012

हमारी कमजोर नस!

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आज के युवा जो अपने भविष्य निर्माण के लिए पढ़ रहे हें और माँ बाप जिन्हें अपने घर गाँव से दूर , चाहे वे खुद नमक रोटी खा लें लेकिन बेटे के लिए ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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