मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

रविवार, 20 मई 2012

बुजुर्गों का मनोविज्ञान !

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  *चित्र गूगल के साभार . मन है तो मनोविज्ञान भी रहेगा , इसके सीमायें और स्वरूप  उम्र  साथ बदलती रहती  है। मैंने मनोविज्ञानं ...
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शनिवार, 14 अप्रैल 2012

अम्बेडकर जयंती !

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आज अवकाश का दिन है क्योंकि आज भीम राव अम्बेडकर जी की जयंती है । अम्बेडकर जी भारत के गणतंत्र राष्ट...
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शनिवार, 7 अप्रैल 2012

ये कैसे संरक्षा गृह ?

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चित्र गूगल के साभार : बालिका संरक्षा गृह सरंक्षा गृह अ...
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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन (१७)

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पल्लवी सक्सेना : संघर्ष एक ऐसा शब्द है जिससे रूबरू कमोबेश सभी को जीवन में होना ही पड़ता है वह बात और है कि कभी लम्बा होता है और कभी छोटा ।...
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रविवार, 1 अप्रैल 2012

वर्ल्ड ऑटिज्म एवेयरनेस डे !

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इस विषय में लिखने से पहले मैं बता दूं कि इस बारे में सारी जानकारी मेरी बेटी सोनू ने दी है जो कि औक्यूपेशनल थेरेप...
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चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन ........

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ये यथार्थ की मिट्टी में सने संस्मरण जीवन के उस पक्ष को उजागर करने वाले हें जो सहने वाले की हिम्मत की दाद तो देते ह...
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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

अर्थ आवर डे !

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धरती पर रहते हुए हमने रोशनी सूर्य से पायी थी और रात में आग जला कर उससे जलने वाले विविध उपकरण से रोशन...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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