ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.
रविवार, 20 मई 2012
शनिवार, 14 अप्रैल 2012
शनिवार, 7 अप्रैल 2012
शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012
रविवार, 1 अप्रैल 2012