मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

सोमवार, 23 जुलाई 2012

नाग पंचमी पर विशेष !

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                                  आज नाग पंचमी पर विशेष रूप से नाग पूजा की परंपरा को सब की तरह से मैंने भी निभाया. वह जीव जिसे हम...
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गुरुवार, 19 जुलाई 2012

लावारिस - बावारिस !

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         ये आम बात है लेकिन इतने हद जाना हर किसी की वश की  बात नहीं। आज घर के बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करना आम बात है, उन्हें घर से बा...
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मंगलवार, 17 जुलाई 2012

एक मूक श्रद्धान्जलि !

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***** क्षमा इस बात के लिए की ये 13 लेख जुलाई को पोस्ट होना  लेकिन हमारी नेट सेवा  ने  आज  होने दिया.       अखबार में एक छोटी सी खबर पढ़ी औ...
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बुधवार, 11 जुलाई 2012

आम आदमी कौन है ?

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                   आम आदमी कौन है?                                 माननीय गृह मंत्री जी  का बयान  उन्हें एक गैर जिम्मेदार मंत्री और लोक...
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मंगलवार, 10 जुलाई 2012

तकनीकी शिक्षा : गुणवत्ता या संख्या ?

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                          शिक्षा के क्षेत्र में इतनी प्रतियोगिता चल रही है कि हर बच्चे का सपना अब कहीं और नहीं बल्कि इंजीनियर या डॉक्टर ब...
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शनिवार, 7 जुलाई 2012

नाम रह जाएगा ..........

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       उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी युवा सोच के  प्रयोग   का प्रयास कर रहे  या फिर  राजनीतिक निर्णयों की उलटफेर कर पिछली सरकार के  कदमो...
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मंगलवार, 3 जुलाई 2012

गुरु पूर्णिमा पर !

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              गुरु वह होता है जो जीवन को सही दिशा देता है।. बचपन में माँ प्रथम गुरु और पिता द्वितीय गुरु होता है .     वैसे तो जननी और जनक...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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