मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

बुधवार, 27 मार्च 2013

हौसले को सलाम (९ ) !

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  क्या हमारे लिए अपना संघर्ष ही हमेशा बड़ा  लगता है लेकिन अगर हमने अपने संवेदनशील ह्रदय से  आस पास के चरित्रों को ध्यान से  देखें तो  पता च...
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सोमवार, 25 मार्च 2013

कलम का क्रांतिकारी : गणेश शंकर विद्यार्थी !

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                                कलम का  क्रांतिकारी : गणेश शंकर विद्यार्थी !                                              गणेश शंकर विद्यार्...
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रविवार, 24 मार्च 2013

हौसले को सलाम (8)

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                       जिन्दगी जितने लोगों की  हैं उसके  उतने ही रंग देखने को मिलते हैं  यह बात  नारी में ही देखने को मिलाती है की वह कितने...
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शनिवार, 23 मार्च 2013

शहीद दिवस पर !

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                     आज शहीद दिवस पर  तीनों अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि !                    नहीं जानती कि इस  दिन हमारी संसद ...
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शुक्रवार, 22 मार्च 2013

हौसले को सलाम ! ( ७ )

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         हमारा संघर्ष  सिर्फ अपने जीवन में संघर्ष करती हुई माध्यम वर्गीय या उच्च वर्गीय महिलाओं के संघर्ष को ही नहीं देखती है बल्कि  ये ...
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बुधवार, 20 मार्च 2013

हौसले को सलाम ! (६)

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                        वक़्त जिन्दगी में कैसे कैसे लाता है और उन मोड़ों पर कभी इंसान हार जाता है और कभी बड़ी वीरता और धै...
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सोमवार, 18 मार्च 2013

हौसले को सलाम (५)

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                  जिन्दगी सबकी  में  अपने अपने नजरिये का एक स्वरूप होती है. दूसरे की जिन्दगी  किसी के लिए उपहास का  कभी  का सबब  जाती है ल...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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