मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

मंगलवार, 18 जून 2013

गंगा दशहरा : कैसी गंगा ?

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                                                          गंगा दशहरा का हमारे पौराणिक साहित्य में और हमारे धार्मिक भावनाओं से जुडा महत...
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शनिवार, 15 जून 2013

विश्व वयोवृद्ध दुर्व्यवहार विरोध दिवस !

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                             हमारे देश  में तो संयुक्त  परिवार की अवधारणा  के कारण आज जो वृद्धावस्था में है अपने   परिवार में उन लोगों ने अ...
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शुक्रवार, 14 जून 2013

विश्व रक्तदाता दिवस !

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चित्र गूगल के साभार                                                       हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं रक्त सम्बन्ध और उन...
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बुधवार, 12 जून 2013

बाल श्रमिक निषेध दिवस !

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  विश्व बाल श्रमिक निषेध दिवस !                          बच्चों को वैश्विक मुद्दा बनाये जाने का भी जन मानस के मन में जागती मानवीय भावनाओं ...
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गुरुवार, 6 जून 2013

एक अनोखी शादी : विधा सौम्या संग अली अकबर मेहता !

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                    कहाँ से शुरू करूँ ? हम राजनीति  में धर्मनिरपेक्ष होने की बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन निजी जिन्दगी में झांक कर देखिये -...
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बुधवार, 5 जून 2013

विश्व पर्यावरण दिवस !

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                               दिन पर दिन बढती जा रही  हमारी वैज्ञानिक प्रगति और नए संसाधनों से हम सुख तो उठा रहे हैं लेकिन अपने लिए प...
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शनिवार, 18 मई 2013

उत्तर प्रदेश राजनीति के दांव पेंच !

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                                      उत्तर प्रदेश की राजनीति से पूरा देश प्रभावित  है क्योंकि केंद्र में सबसे अधिक सांसद उत्तर प्रदेश से  ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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