मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

रविवार, 25 अगस्त 2013

काउंसलिंग जरूरी है लेकिन किसकी ?

›
                         हम प्रगति करते हुए अंतरिक्ष  तक पहुँच गए है और वहां तक पहुँचाने वाले शोध में देश के हर कोने के वैज्ञानिक जुटे हुए...
11 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 14 अगस्त 2013

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर !

›
                                                             देश  राजनीतिक गतिविधियों से कुछ सरोकार रखना हर देशवासी का हक है . देश हमा...
5 टिप्‍पणियां:
रविवार, 11 अगस्त 2013

नाग पंचमी और बाबूजी का जन्मदिन !

›
               नाग पंचमी पौराणिक  महत्व रखनेवाला पर्व है और इसको हम सदियों से मनाते चले  आ रहे हैं , लेकिन जैसा की नाम से ज्ञात होता है कि...
7 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 10 अगस्त 2013

समाज क्या कहेगा ?

›
                     समाज क्या कहेगा? ये एक जुमला है जो सदियों से सुनते चले आ रहे हैं और युगों से ये समाज नाम की संस्था विद्यमान है औ...
12 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 15 जुलाई 2013

डाक तार सेवायें !

›
                           हमारे देश में डाक तार विभाग बहुत ही महतवपूर्ण विभाग है और उसकी सेवायें कितनों के जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों क...
5 टिप्‍पणियां:

किस्सा ए लाइक औ' कमेंट !

›
                         फेसबुक की महिमा  अपार है क्योंकि मैं तो आज तक इसके रहस्य  समझ ही नहीं पायी वैसे  के  समझने के लिए जितना समय चाहि...
7 टिप्‍पणियां:
रविवार, 14 जुलाई 2013

सतर्क और सावधान रहें !

›
चूंकि ये एक सत्य घटना है और जिसने मुझे अन्दर तक हिला दिया है , इसीलिए आप सबके साथ शेयर कर रही हूँ ताकि आप भी अगर कभी ऐसे हालात देखें तो कम ...
23 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.