मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग पर सक्रियता कम हो रही है ? (7)

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                  हम कम लिखें या नियमित लेकिन ब्लॉग की अपनी एक अलग जगह है , जो स्थायी है और संचित रखने वाली भी है।  उससे अगर हम सिर्फ इसा ...
4 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 28 अक्टूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग लेखन पर सक्रियता कम हो रही है ! (6 )

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                               ये ये विषय बहुत  ज्वलंत बन  चुका  है क्योंकि  कहीं न कहीं हमारा  ब्लॉग लेखन प्रभावित अवश्य ही हो  रहा है। ...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग पर सक्रियता कम हो रही है ? (5)

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                  कहने को तो फुरसतिया जी नाम से लगते हैं  कि  बड़ी फुरसत में रहते होंगे,  लेकिन विषय पर उन्होंने अपने ब्लॉग से कथन उठाने  ...
8 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 23 अक्टूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग पर सक्रियता कम हो रही है ? (4)

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                        विषय अच्छा है और इस पर  का भी उतना ही महत्व है जितना की इसको महसूस कर मन में रखने वालों में - अरे भाई आप भी  अपनी...
10 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग पर सक्रियता कम हो रही है ? ( 3 )

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                           बहुत महत्वपूर्ण विषय  है ये और इसके विषय में मैं  सोचती हूँ और इसा के बारे में हमारे ब्लॉगर मित्र जो कहते हैं ...
9 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग पर सक्रियता कम हो रही है ? (2)

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              पिछली पोस्ट पर हमने  अपने मित्रों के विचार इसा विषय पर पढ़े और अब आगे चलते हैं।  यद्यपि  दो मित्...
16 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग पर सक्रियता कम हो रही है ?

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              जिसे मैं महसूस कर  हूँ , उसे और भी हमारे साथी भी महसूस कर  हैं लेकिन महसूस करने से कुछ नहीं होता।  कुछ  इस  तरह से सोचा जाय...
19 टिप्‍पणियां:
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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