मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

शनिवार, 17 मई 2014

माँ तुझे सलाम ! (५)

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                                     माँ हो वो शख्स होती है जो बच्चों को पहला शब्द बोलना सिखाती है।  जीवन में बड़े होने के साथ साथ जीवन के न...
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शुक्रवार, 16 मई 2014

माँ तुझे सलाम ! (४)

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                        माँ कहीं सामने होती है और उपेक्षित होती है लेकिन कहीं वह जीवन भर पलकों पर बिठायी जाती है।  उसके रहने भर से लगता है...
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गुरुवार, 15 मई 2014

माँ तुझे सलाम ! (3)

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                  किस रूप में माँ अपने बच्चोँ के मन मेँ अपनी छवि अंकित कर जाती है ये तो उसके अपने बच्चे हि सबसे अधिक आंक सकते हैं और फिर उ...
10 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 14 मई 2014

माँ तुझे सलाम ! (2)

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                                           माँ से जुडी भावनएं और दिल से जुड़ा नाता कभी व्यक्त तो नहीं कर सकते  हैं क्योंकि वह तो सिर्फ महसू...
12 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 13 मई 2014

माँ : तुझे सलाम ! (1)

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                                             मातृ दिवस वैसे तो पश्चिम से आया हुआ कहा जाता है लेकिन माँ की जगह तो शायद हर जगह एक जैसी ही है ...
13 टिप्‍पणियां:
रविवार, 11 मई 2014

माँ तुझे सलाम !

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                   माँ हर जीवन की आधारशिला - एक जीवन जिससे जुड़ कर अस्तित्व में आता है और फिर धरती पर आते ही खुद माँ से अलग करके उसे स्वतन्त...
6 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 1 मई 2014

मजदूर दिवस !

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                                                     हर साल की तरह फिर १ मई आई और मजदूर दिवस के लिए अखबारों में कुछ देख छपे . सरकारी कार...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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