मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

मंगलवार, 9 सितंबर 2014

घरेलू आतंकवाद : अनदेखा क्यों ?

›
वे हमारी जड़ों में तीखा जहर बो रहे हैं , और हम हैं  कि जाग कर भी सो रहे हैं . दूसरों को अंगुली दिखा कर बनते हैं  हो...
2 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 8 सितंबर 2014

पितृ पक्ष : वर्तमान में औचित्य !

›
                सिर्फ हिन्दू धर्म में ही वर्ष  में १५ दिन पूर्वजों को समर्पित होते हैं  इन दिनों में हम अपने पूर्वजों को पूर्ण श्रद्धा से स...
3 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

यादें : शिक्षकों की !

›
                        आज शिक्षक दिवस पर मैं अपने सभी शिक्षकों जो मुझे प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा तक या कार्य स्थल पर मिले, मुझे शिक्ष...
4 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 27 अगस्त 2014

बुजुर्गों का भविष्य !

›
                                           अखबार में पढ़ी हुई कई घटनाएँ हमें विचलित कर जाती हैं लेकिन कुछ तो  अपने पीछे इतने सारे प्रश्न छो...
11 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 18 अगस्त 2014

चट मंगनी पट ब्याह : कितना उजला कितना स्याह !

›
                                   '' विवाह " जैसी सामाजिक संस्था का अस्तित्व जितना महत्वपूर्ण दशकों पूर्व था वैसे अब नहीं रह ...
3 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

संघर्ष उनका : गर्व हमारा या शर्मिंदगी !

›
                               पढने में कुछ अजीब सा लग रहा है ये शीर्षक लेकिन इससे ही वो भाव उभरते हैं जो हमें कहना है और वो महसूस करते ह...
शनिवार, 19 जुलाई 2014

ये उत्तर प्रदेश है !

›
                                                                      ये उत्तर प्रदेश है , जहाँ के नेताजी औरतों की अस्मत से खेलने को: लड़क...
3 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.