ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.
गुरुवार, 8 जनवरी 2015
शनिवार, 29 नवंबर 2014
गुरुवार, 27 नवंबर 2014
शुक्रवार, 14 नवंबर 2014
शनिवार, 1 नवंबर 2014
शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2014