मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

नया शिक्षा सत्र : सतर्कता एवं सुरक्षा !

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                          वर्तमान समय  बच्चों , अभिभावकों , शिक्षकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।  वैसे तो अब शिक्षा सत्र के बदल जाने...
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साहित्य में सेंध लगाता सोशल मीडिया !

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                                           सोशल मीडिया जिसने हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बना रखा है , वह सिर्फ लोगों को ही नहीं बल्कि स...
गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

विवाह :तेरे कितने रूप !

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                        विवाह एक सामाजिक संस्था ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के अनुसार एक महत्वपूर्ण संस्कार है।   ये सृष्टि को सतत चलाने ...
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रविवार, 1 अक्टूबर 2017

अंतर्राष्ट्रीय वयोवृद्ध दिवस !

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                             आज अंतर्राष्ट्रीय  वयोवृद्ध दिवस है। हर घर में वरिष्ठ लोग होते हैं और हमें उनका सम्मान करना चाहिए।...
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शनिवार, 30 सितंबर 2017

एक नयी दिशा की ओर :कन्या भोज .!

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                            इस वर्ष नवरात्रि के दिनों में हमेशा की तरह कन्यायें खिलानी थी और इसके लिए मेरी मानस पुत्री रंजना यादव   ने मु...
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गुरुवार, 21 सितंबर 2017

ब्लॉगिंग के 9 वर्ष !

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                                                             ब्लॉगिंग के ९ वर्ष !                                                         ...
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रविवार, 10 सितंबर 2017

आ अब लौट चलें ! ( विश्व ग्रैंड पेरेंट्स डे )

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                                          एक समय था जब कि घर की धुरी दादा दादी ही हुआ करते थे या उनके भी बुजुर्ग होते थे तो उनकी हर काम में...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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