मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

सोमवार, 25 मार्च 2019

चरित्र सिर्फ नारी का क्यों ?

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                               निर्मला को उसके घर वालों ने उसी समय  घर से निकाल दिया अगर  वह कमा कर सबको खिला न रही होती।  वह तेज बारिश के ...
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सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

सबक !

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                                  जीवन की दिशा कब और कौन बदल दे नहीं कह सकते हैं और मेरे जीवन की दिशा सिर्फ दो पंक्तियों ने बदल कर रख दी ह...
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रविवार, 3 फ़रवरी 2019

विश्व कैंसर दिवस !

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                                            कैंसर विश्व में इस समय सबसे बड़ी और गंभीर बीमारी बनी चुकी है और इसके रोगी दिन पर दिन बढ़ते ...
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सोमवार, 10 दिसंबर 2018

भारतीय समाज में विवाह !

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                              भारतीय समाज में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्था है बल्कि दूसरे शब्दों में कहें तो परिवार की नींव यही है । वैसे तो...
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शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

नया शिक्षा सत्र : सतर्कता एवं सुरक्षा !

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                          वर्तमान समय  बच्चों , अभिभावकों , शिक्षकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।  वैसे तो अब शिक्षा सत्र के बदल जाने...
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साहित्य में सेंध लगाता सोशल मीडिया !

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                                           सोशल मीडिया जिसने हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बना रखा है , वह सिर्फ लोगों को ही नहीं बल्कि स...
गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

विवाह :तेरे कितने रूप !

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                        विवाह एक सामाजिक संस्था ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के अनुसार एक महत्वपूर्ण संस्कार है।   ये सृष्टि को सतत चलाने ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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