मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

शनिवार, 21 सितंबर 2019

ब्लॉगिंग के 11 वर्ष !

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ब्लॉगिंग के 11 वर्ष !                                      वह साल 2008 का था जब मेरा ब्लॉगिंग से परिचय हुआ था और वहीँ से दिशा मिली थी खुद...
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रविवार, 15 सितंबर 2019

बेटियों का दंश (५) !

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        लोगों ने जीना हराम कर दिया।  तरह तरह के सवाल कभी कभी हमें खुद अपराधबोध कराने लगे थे। --पांच पांच लड़कियां है कब  करेंगे शादी ? --अ...
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गुरुवार, 12 सितंबर 2019

राजभाषा हिंदी का सफर : संविधान से प्रयोग तक !

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राजभाषा हिंदी का सफर : संविधान से प्रयोग तक !                                        हिंदी को संविधान में राजभाषा का स्थान प्राप्त हुए 69...
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मंगलवार, 3 सितंबर 2019

ओणम्

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ओणम् ---------                  भारत भूमि पर अनेक धर्म और मतों के लोग रहते हैं और सबके अपने अपने त्यौहार हैं । कुछ त्यौहार सम्पूर...
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शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

जरा याद उन्हें भी कर लो .!

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                            1957 की क्रांति की कानपुर की वीरांगनाएँ !                         हमारा देश सिर्फ वीरों का ही नहीं अपितु वीरा...
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शनिवार, 10 अगस्त 2019

कहाँ आ गये हम ?

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                       सदियों से चली आ रही सृष्टि और उसकी संस्कृति  को हम बरकरार  न रख पाए। हमने छोड़ते छोड़ते सब छोड़ दिया पर दिखाई किसी को न...
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मंगलवार, 4 जून 2019

विश्व पर्यावरण दिवस !

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विश्व पर्यावरण दिवस !    विश्व पर्यावरण दिवस की आवश्यकता संयुक्त राष्ट्र संघ ने महसूस की और इसी लिए प्रतिवर्ष 5 जून को इस दिवस को मनाने क...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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