मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

मंगलवार, 24 मार्च 2020

गुड़ी पड़वा / नव संवत्सर /युगादि !

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                     फाल्गुन के जाने के बाद उल्लासित रूप से चैत्र मास का आगमन होता है। प्रकृति ने चारों और पीत  रंग बिखेर कर मन उल्लास से भ...
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सोमवार, 23 मार्च 2020

शहीद दिवस - 23 मार्च !

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                    आज २३ मार्च उन तीन वीरों  भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के बलिदान होने का दिन हैं,  जिन्होंने अंग्रेजी सरकार की चू...
गुरुवार, 12 मार्च 2020

ईगो एक मनोविकार !

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       अखबार में एक खबर पढ़ी थी - "पति ने "सॉरी" नहीं कहा तो गर्भवती ने आग लगा ली।" पढ़ा और उसकी तस्वीर भी देखी और फिर एक...
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गुरुवार, 30 जनवरी 2020

करियर या शादी !

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                                      यहाँ हम यह बात एक महिला या लड़की के लिए कर रहे हैं क्योंकि अपनी सुरक्षा , आत्मनिर्भरता और एक  अच्छे जी...
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बसंत.पंचमी !

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बसंत पंचमी पर्व:-                         बसंत पंचमी  हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व  है।  यह त्यौहार हर साल हिंदू पंचांग (कैले...
मंगलवार, 14 जनवरी 2020

मकर संक्रांति !

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                    मकर संक्रान्ति हिंदु धर्म में एक प्रमुख पर्व है।  पौष मास में जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तभी य...
बुधवार, 1 जनवरी 2020

वो सर्दी और ये सर्दी !

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संस्मरण                    आज के तापमान को देखते हुए अखबार में 1961- 62 की सर्दियों का जिक्र किया गया तो याद आया कि वह सर्दियां आज की तरह ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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