मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

रविवार, 21 जून 2020

बालिका संरक्षण गृह क्यों संदिग्ध हैं ?

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                    आज फिर वही खेल सामने आया और यह कोई पहली बार नहीं हुआ है । पूरा इतिहास है हमारे सामने  कि बाल संरक्षण गृह में रहने वाली ...
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शुक्रवार, 12 जून 2020

कभी यही हमारा जीवन था !

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        जब से कोरोना वायरस का हमारे देश मेंं प्रवेश हुआ , एक साथ बहुत सारी चीजों के लिए सतर्क हो गए लेकिन हमारे ग्रामीण जीवन में किसी विशेष...
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गुरुवार, 4 जून 2020

विश्व पर्यावरण दिवस !

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विश्व पर्यावरण दिवस !    विश्व पर्यावरण दिवस की आवश्यकता संयुक्त राष्ट्र संघ ने महसूस की और इसी लिए प्रतिवर्ष 5 जून को इस दिवस को मनाने क...
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बुधवार, 3 जून 2020

खिताबों की लूट है , लूट सके तो लूट ....!

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            भई हम तो किसी काबिल नहीं , कमोबेश पचपन साल हो रहे है कलम उठाये हुए और मिला क्या ठेंगा ? फिर मिले भी क्यों ?  बड़ी सिद्धांतों व...
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बुधवार, 27 मई 2020

जागरूक माँ बनें !

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                              माँ बनना हर स्त्री के लिए गौरव की बात होती है और स्वस्थ संतान की कामना भी हर माँ करती है। मैंने लगातार बच्चों...
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रविवार, 24 मई 2020

प्रवासियों का दर्द !

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           कोरोना ने सम्पूर्ण देश में ऐसे पैर पसारे कि हर तरफ त्राहि त्राहि मच रही है। लम्बे लॉक डाउन ने उनको खाने पीने के लिए मजबूर कर ...
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शुक्रवार, 15 मई 2020

विश्व परिवार दिवस !

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आज विश्व परिवार दिवस है और यह भी पाश्चात्य सभ्यता से परिचय के बाद मनाने की हमारे देश में आवश्यकता हुई क्योंकि हम सदैव से संयुक्त परिवार और व...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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