मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

रविवार, 2 जनवरी 2022

अनियोजित नववर्ष !

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                                                                                               जब से होश सँभाला तब से हर वर्ष , वर्ष के पहले...
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बुधवार, 6 जनवरी 2021

वर्क फ्रॉम होम : सुखद या दुखद !

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 वर्क फ्रॉम होम : सुखद या दुखद !                                    आईटी  कंपनी के लिए वर्क फ्रॉम होम एक अच्छा विकल्प था कि कर्मचारी को कभी ...
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रविवार, 20 दिसंबर 2020

ये अनमोल रिश्ते !

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 ये अनमोल रिश्ता!                                 जीवन में कुछ रिश्ते तो जन्म से बन जाते हैं और कुछ रिश्ते बस भावात्मक रूप से बने होते हैं औ...
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रविवार, 6 दिसंबर 2020

कोरोना वैक्सीन !

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  कोरोना वैक्सीन                                    विगत महीनों से  कोरोना ने पूरे विश्व को अपनी अँगुलियों  पर नचा रखा  है और वह इंसान जिसने...
मंगलवार, 15 सितंबर 2020

हिंदी दिवस और हमारे इरादे !

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                              हमने आज तक देखा कि हिंदी के प्रति बड़ी बड़ी बातें , बड़े बड़े संगठनों और फिर दम तोड़ते उनके इरादे , वादे और हौसले...
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मंगलवार, 18 अगस्त 2020

रास्ते खुद बनाने पड़ते हैं !

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 #रास्ते_खुद_बनाने_पड़ते_हैं !              सच  कहूँ अभी एक लेखिका बहन की आपबीती सुनी  तो अपनी यादें भी फुदकने लगी और मन आया कि जिंदगी वक्त न...
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रविवार, 26 जुलाई 2020

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कारगिल विजय दिवस !                           भारत पाकिस्तान के बीच होने वाले युद्धों की शृंखला में 1965, 1971 के युद्धों में मुँ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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