मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

गुरुवार, 4 अगस्त 2022

पागलपन !

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  पागलपन !               मनुष्य की एक दिमागी हालत जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार नहीं होता है।  फिर जिम्मेदार कौन है ? उसकी मस्तिष्क संरचना. हा...
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मंगलवार, 28 जून 2022

शाश्वत धर्म!

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  शाश्वत_धर्म !                                    हम धर्म की परिभाषा पंथ में खोजने में लगे हैं और पंथ अपने अपने धार्मिक ग्रंथों की दिशा मे...
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बुधवार, 15 जून 2022

विश्व वयोवृद्ध दुर्व्यवहार निरोधक दिवस !

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              हमारे देश  में तो संयुक्त  परिवार की अवधारणा  के कारण आज जो वृद्धावस्था में है अपने   परिवार में उन लोगों ने अपने बुजुर्गों  ...
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सोमवार, 14 फ़रवरी 2022

पुरुष विमर्श - 3

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 पुरुष विमर्श - 3  निम्न मानसिकता                आज की कहानी का एक छोटा सा हिस्सा मेरे गिर्द भी घट रहा था और मैं निर्विकार उसको समझ रही थी ।...
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बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

झांसे का मनोविज्ञान !

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  झाँसे का मनोविज्ञान !                             झाँसा आज के युग में ही नहीं बल्कि ये प्राचीन काल से चला आ रहा है और इससे जुड़ा हुआ रहता क...
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सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

पुरुष विमर्श - 2

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बेटी की जगह !                              परिवार उससे जुड़ा था, जिसने दोनों को मुझसे मिलवाया। सीमा भी गई थी लड़की वालों के यहाँ गोद भराई में।...
गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022

पुरुष विमर्श - 1

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 पुरुष विमर्श - 1     अभिशाप !                 ऋषि ने अपने पिता से प्रस्ताव रखा था , अपनी पसंद की शादी का । मध्यम वर्गीय पिता ने एक बार समझा...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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