आपदा में अवसर !
बहुत दिनों से देखते चले आ रहे है कि प्राकृतिक आपदा हो या फिर मानव जनित - लोगों को कमाई के अवसर मिलने लगते हैं। भौतिक रूप से मिला तो लोगों ने संचयन करना शुरू कर दिया, ताकि आगे चलकर उसको ब्लैक में बेचकर धनवान बना जा सके। इस काम से आम आदमी के लिए संकट पैदा होने लगता है। यहाँ तक तो ठीक है लेकिन आदमी आभासी दुनिया का इतना गुलाम हो चुका है कि उसका जीवन इनसे ही निर्देशित होने लगा है। सभी को इस विषय में गहन जानकारी नहीं होती और वे सहज विश्वास कर उसको अपनाने लगते हैं। इससे ठगों के भाग्य खुलने लगे हैं।
इस समय विश्व की जो स्थिति है, उसको लेकर रोज नयी भविष्यवाणी होने लगी हैं और फिर अगर देखना शुरू कीजिये तो उसी विषय विशेष से सम्बंधित आपको सैकड़ों रील और वीडिओ मिलने लगेंगे।
इस विषय पर कई महीनों तक अध्ययन के बाद इसकी तह तक पहुँची हूँ, बल्कि इसके साथ ही कुछ परिचित मेरे कार्य को जानते हुए सलाह लेने के लिए आये कि वे चारों तरफ से आने वाली खबरों न कहें तो वह जो अपना समय रील और वीडिओ देखने में बिताते हैं , डिप्रेशन के शिकार होने लगे हैं। जब उनसे इसकी वजह पूछी तो स्पष्ट रूप से पता चला कि चारों तरफ से यही बात सुनने को मिल रही है कि किसी दिन ऐसा केमिकल वार शुरू हो जायेगी कि कुछ भी न बचेगा। इससे बचने के उपाय भी बताये जा रहे हैं और जब वे जिस विषय की रील या वीडिओ देखते हैं उससे सम्बंधित ढेर सारी रील और वीडियो आते चले जा रहे हैं।
रही सही कसर एआई पूरी कर रही है, समझदार तो समझ रहे हैं लेकिन वे जो सिर्फ समय बिताने के लिए मोबाइल को साधन बना चुके हैं और फिर श्लीलता और अश्लीलता कुछ भी परोसा जाने लगा है और मानसिक व्याभिचार की संतुष्टि पा रहे हैं। उससे भी मूर्खतापूर्ण कार्य यह है कि हजारों लोग लाइक और शेयर करते जा रहे हैं। आप समय दे रहे हैं और मिल क्या रहा है?
शायद सबको नहीं मालूम कि आपके अवचेतन मस्तिष्क में जाकर यह सब बातें अपनी जगह बना रहीं हैं और फिर आपका अपनी विचारशीलता इससे प्रभावित होती है और आपकी निर्णय क्षमता भी क्षीण होती है। सावधान हो जाइए अब भी समय है, मत बनिए इसके गुलाम। इन रील के अतिरिक्त स्वास्थ्य, कलात्मक अभिरुचि, शैक्षिक एवं साहित्यिक रील और वीडियो भी है, उनको देखिए और ज्ञान बढ़ाइये।
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