मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

श्रमिक दिवस ! (कानपुर के संदर्भ में )

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                  आज का दिन  कितने नाम से पुकारा जाता है ? मई दिवस , श्रमिक दिवस और महाराष्ट्र दिवस।  अगर विश्व के दृष्टिकोण  देखें तो मज...
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रविवार, 26 अप्रैल 2020

अक्षय तृतीया !

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                         हमारे अन्दर परोपकार की भावना का ह्रास हो रहा है और निजी स्वार्थ की भावना बलवती होती चली जा रही है . सिर्फ हम...
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बुधवार, 22 अप्रैल 2020

विश्व पृथ्वी दिवस !

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"क्षिति जल पावक गगन समीरा"                  ये पांच तत्त्व है जिनसे मिलकर हमारा शरीर बना है , इससे ही हमारा जीवन चलता है और व...
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मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

ब्लॉगिंग : कल , आज और कल !

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ब्लॉगिंग : कल , आज और कल !                        जैसे किसी चीज का आरम्भ मंदिम गति से होता है और फिर वह एक चरम पर पहुँच जाता है और फिर अ...
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शनिवार, 18 अप्रैल 2020

नया शिक्षा सत्र : सतर्कता और सावधानी!

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                          वर्तमान समय  बच्चों , अभिभावकों , शिक्षकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।  वैसे तो अब शिक्षा सत्र के बदल जाने...
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गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

कोरोना और महिलाओं की भूमिका !

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           कोरोना के बारे में बहुत कुछ पढ़ रहे हैं लेकिन इसके पीछे घर , लॉक डाउन , कामकाजी लोगों का घर में सीमित हो जाना - उनकी जान बचने के ...
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

वर्तमान परिप्रेक्ष्य : साहित्यकार की भूमिका!

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                                                       वर्तमान परिप्रेक्ष्य में साहित्यकार की भूमिका बहुत  महत्वपूर्णं है क्योंकि आज जो...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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