मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024

कर्म का धर्म !

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   कर्म का धर्म !                                                 जीवन में जो कर्म इंसान करता है और उसके फल भी संचित होते है लेकिन इन कर्मों...
बुधवार, 18 सितंबर 2024

श्राद्ध और श्रद्धा !

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                     श्राद्ध और श्रद्धा !                                      हर बार श्राद्ध के पंद्रह दिनों में खूब चर्चा होती है कि जीते ...
शनिवार, 14 सितंबर 2024

हिन्दी का स्वरूप !

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                                                                        हिन्दी  का स्वरूप !                   हिन्दी दिवस पर बहुत कुछ लिखा ...
शुक्रवार, 2 अगस्त 2024

मौत के सौदागर !

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  वह कथोक्ति है न कि जो दूसरों के लिए कुआँ खोदता है ईश्वर उनके लिए खाई खोद कर तैयार कर देता है, लेकिन  ये कहावतें त्रेता , द्वापर या सतयुग...
बुधवार, 17 जुलाई 2024

महत्वपूर्ण क्या ? : करियर या जीवन !

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                                      यहाँ हम यह बात एक महिला या लड़की के लिए कर रहे हैं क्योंकि अपनी सुरक्षा , आत्मनिर्भरता और एक  अच्छे जी...
मंगलवार, 11 जून 2024

विश्व बाल श्रमिक निषेध दिवस !

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  विश्व बाल श्रमिक निषेध दिवस !                          बच्चों को वैश्विक मुद्दा बनाये जाने का भी जन मानस के मन में जागती मानवीय भावनाओं...
बुधवार, 1 मई 2024

श्रमिक दिवस !

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                                                                         श्रमिक दिवस !                       विश्व में सभी को एक दिन का सम्...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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