मेरा सरोकार

ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जब भी और जहाँ भी ये अनुभव होता है कि इसको तो सबसे बांटने और पूछने का विषय है, सब में बाँट लेने से कुछ और ही परिणाम और हल मिल जाते हैं. एकस्वस्थ्य समाज कि परंपरा को निरंतर चलाते रहने में एक कण का क्या उपयोग हो सकता है ? ये तो मैं नहीं जानती लेकिन चुप नहीं रहा जा सकता है.

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन (८)

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मुकेश कुमार सिन्हा रास्ते जिन्दगी के सुगम...
16 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन (७)

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अनीता कुमार संघर्ष के अलग अलग स्वरूपों को हम देख रहे हें ...
20 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

chunauti jindgi kee: sangharsh bhare ve din (६)

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वंदना गुप्ता सबके जीवन के संघर्ष ए...
14 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन (५)

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डॉ रूपचंद शास्त्री 'मयंक ' : जीवन में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो कि जिसको सरल सरिता की तरह से बहते हुए मिला हो। ये ज...
15 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

चुनौती जिन्दगी की : संघर्ष भरे वे दिन (४)

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रश्मि प्रभा : मेरी दृष्टि से संघर्ष करके अगर हम जीत गए हें तो उसको अगर संस्...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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