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बुधवार, 11 मई 2011

ये तो हद है!

आस्ट्रेलिया में भारतीयों के साथ हो रहे विगत वर्षों से दुर्व्यवहार की खबरें - यहाँ तक कि हमले और हत्याओं तककी घटनाएँ आम हो चुकी हैं हम ये सब पढ़ और सुन कर आदी हो चुके हैं कौन सा हमारे घर या परिवार का कोईइसमें त्रसित है। हम आज भी वहाँ जाने के लिए तैयार हैं चाहे अपना जमीर ही बेच कर क्यों रहना पड़े?
आज अख़बार में पढ़ा कि बिकनी पर हिन्दू देवी लक्ष्मी के तस्वीर का प्रिंट छापने से कारण विवाद
से घिरीआस्ट्रेलियाई कंपनी लीसा ब्लू स्विमवियर ने माफी मांगी - ' अगर हमारे करण आपकी भावनाएं आहट हुई हैं , तो हम उसके लिए माफी माँगते हैं।'


सिर्फ बिकनी के लिए माफी माँग ली गयी , उस दिन टाइम्स ऑफ इंडिया में छापे हुए समाचार में इस बिकनी केअतिरिक्त कुछ जोड़ी जूते भी उसमें प्रदर्शित किये गए थे इनके ऊपर गणेश, और अन्य धार्मिक प्रतीक चिन्होंको बनाया गया था। क्या ये किसी भी धर्म का अनुयायी हो इस बात को सभी समझते हैं कि अगर हम किसी कीआस्था या विश्वास के प्रति इस तरह का व्यवहार करेंगे तो वह अनुचित की श्रेणी में रखा जाएगा।
लेकिन शायद इंसान की सोच इससे अधिक व्यावसायिक हो गयी है उसको प्रचार मिलना चाहिए चर्चित तो हुए शायद इससे पहले इस कंपनी को भारत में कोई जानता हो लेकिन अब सभी लोग जान गए हैं।
देवी देवता या धर्म ग्रन्थ ऐसे आस्था से जुड़े हैं कि इनके अपमान और प्रतिकार के लिए युद्ध या विद्रोह कुछ भी होसकता है। अगर विदेशी यह जानते हैं कि ये हिन्दू धर्म के देवी देवता या पूज्य हैं तो फिर उनका प्रयोग क्या प्रदर्शितकरता है? बिकनी या जूते पर जीसस कि तस्वीर क्यों नहीं लगाई गयी? सिर्फ इस लिए कि वे किसी धर्म के लिएपूज्य पुरुष हैं। फिर दूसरे कि भावनाओं को आहत करने के लिए ऐसा काम क्यों किया गया? क्या सिर्फ माफी मांगलेने से हम उनको माफ कर पायेंगे? शायद नहीं। ये तमाशा धर्म ग्रंथों के लिए भी होता रहा है। लेकिन किसी कासार्वजनिक तौर पर अपमान करने के बाद उससे माफी मांग ली जाय तो अपराध क्षम्य हो जाता है। आस्था एकऐसी भावना है कि जिसके लिए अगर कोई आहत करे तो फिर कम से कम मैं तो क्षमा नहीं कर सकती जिन देवीदेवताओं को हम सर नवाते हैं उनको जूतों में बना कर बनाने वाले क्या प्रदर्शित करना चाहते हैं? व्यापार के लिएइन सब को भी प्रचार तंत्र का हिस्सा बना लिया जाय। बदनाम होंगे तो क्या नाम होगा? ऐसे मामले को विश्वपटल पर उठना जरूरी है ताकि भविष्य में आस्था को इतने अश्लील तरीके से कोई प्रयोग कर सके।