गुरुवार, 6 जून 2013

एक अनोखी शादी : विधा सौम्या संग अली अकबर मेहता !

                   कहाँ से शुरू करूँ ? हम राजनीति  में धर्मनिरपेक्ष होने की बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन निजी जिन्दगी में झांक कर देखिये - वह सब कहने की बात और अमल करने की और ही होती है . लेकिन जो कुछ  बोले ही नहीं और करके गुजर गए . हम तो उनके दिल में झांक कर देख ही नहीं पाए कि वो इतना विशाल कैसे है ? इसमें दोनों ही परिवार के बड़े सदस्यों और फिर इस नयी पीढी के निर्णय का सम्मान करने के लिए वाकई बधाई के पात्र हैं .



                          ये शादी है विधा सौम्या ( पुत्री विभा रानी और अजय ब्रह्मात्मज ) अली अकबर मेहता ( पुत्र फातिमा एवं युसुफ मेहता ) . यहाँ बताते चले कि  दोनों ही  कलाकार हैं और अली तो प्रसिद्द कलाकार तैयब मेहता के पोते हैं . वह भी हर तरीके से अनोखी जहाँ दोनों की भावनाओं का सम्मान करते हुए हर रस्म पूरी की गयी . सबसे पहले शादी के कार्ड से शुरू करते हैं . हमने आपने दोनों ने दोनों धर्म के शादी के कार्ड देखे लेकिन ये कार्ड सबसे अलग - न इसमें ईश्वर का नाम और न अल्लाह का . कोई तस्वीर भी नहीं है . कुछ ऐसा है कार्ड --


     
                                                               June 1, 2013 

                                                              Madh Island , Mumbai 


                           

                                बस शादी की तारीख  के साथ कुल एक चित्र से सजा अनोखा कार्ड भी है . जिसमें अन्दर भी एकदम सादे ढंग  कन्या और वर के साथ सिर्फ उनके माता -पिता के नाम हैं . सबसे अलग और सबसे अनोखा सा कार्ड .  उसके ऊपर का चित्र भी पुराने ज़माने के कैमरे ( जिसमें कला कपड़ा ओढ़ कर फोटोग्राफर मुस्कराने के लिए कह कर ढक्कन घुमाया और बस हो गयी फोटो ). से निकलवाया गया है . वह भी एकदम ज़माने की दौड़ से अलग विशेष चित्र . 

           अब हम परिचय कर लें कन्या और वर से - जिन्हें हम सगाई के अवसर पर कैसे लगे देख रहे हैं ? 




          हमारे घर में हमारे घर जैसी सारी  रस्में हुईं क्योंकि शादी से पहले की सारी  रस्में तो हम अपने ढंग से कर रहे हैं . घर में सभी मेहमानों के आने के साथ शुभंकर और तेल हल्दी और मंडप की सारे  कार्यक्रम तो होने ही चाहिए और वह हुए भी .........



 मुंबई के घर और गाँव  के घरों में कुछ तो अंतर होता ही है और फिर मंडप की उपलब्धि भी एक बात है लेकिन आज कल प्रतीकात्मक साधन भी दिल को पूरी तसल्ली देने वाले होते हैं क्योंकि अपने अपने घर के सारे  शगुन पूरे कर लिए . शुभ काम में कोई कमी न रह जाए . सो मंडप भी अपने पूरे लाव लश्कर के साथ स्थापित किया गया .


    मंडप गाड़ने की रस्म पूरी हुई तो फिर कन्या के लिए तेल हल्दी की रस्में भी पूरी की गयीं . हम अपने तरफ से कोई कमी तो छोड़ नहीं सकते हैं . हमारी मान्यताएं और परम्पराए हमारे साथ जुडी जो रहती हैं . फिर विवाह जैसा काम हो और हम अपने घर में शगुन के सारे  काम न करें ये तो हो नहीं सकता है . पीली साडी में सजी विधा को शादी के एक दिन पहले  हल्दी चढ़ाई गयी . मैं भी शामिल थी इस कार्यक्रम में .

                       फिर रचाई गयी मेहंदी हम सब के हाथों में भी . दुल्हन की मेंहदी तो पहले ही रच गयी थी . घर में उपस्थित सभी महिलाओं के हाथ में मेंहदी लगी और उस सबसे निबट कर रखा गया था लेडीज संगीत का कार्यक्रम वैसे ये सिर्फ लेडीज संगीत ही नहीं था  बल्कि ये तो जेंट्स संगीत भी था क्योंकि इसमें सभी को पकड़ पकड़ कर नचाया गया था . सभी शामिल भी थे इसमें घर में आये हुए सारे  मेहमान इसका आनंद दे रहे थे.

               अब शुरू करने से पहले कन्या के मम्मी  पापा की एक तस्वीर भी तो देखते चलें 


                            और एक तस्वीर विधा की भी .............



                            शादी के लिए जो जगह चुनी गयी थी , वह किसी फिल्मी दुनियां के सेट जैसी ही थी . मड  आइलैंड में The Club @ Raheja Exotica को चुन गया था . उस स्थान की आतंरिक और बाह्य सज्जा सिर्फ कुछ शब्दों में या पंक्तियों में बयां करना संभव नहीं है . एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ वह कार्य स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और सजावट से लग रहा था कि  जैसे हम किसी फिल्मी  के सेट पर आ गए हों .  कुछ ही चित्रों से इसको सजाया जा सकता है . इससे ही अनुमान लगाया जा सकता है कि  कितना अनुपम वातावरण वहां होगा .
                      मेहमानों को बैठने के लिए चारों तरफ से नारियल के पेड़ों से घिरा और फूल और अन्य पेड़ों से सज्जित कार्यस्थल   अपने आप में अनोखा दृश्य प्रस्तुत कर रहा था . मेहमानों को बैठने के लिए बड़े से स्टेडियम की तरह से गोल घेरे में बनी जगह को बड़ी खूबसूरती के साथ सफेद चादर से ढंके हुए गद्दे और मसनद के साथ लगे हुए सजीले कुशन लगा कर आसन तैयार किये गए थे . ताकि सभी कार्यक्रम के आनंद को उठा सकें .


                   ये तो आने वाले मेहमानों के लिए नियत स्थान हुआ और जहाँ पर कार्यक्रम होने थे वह स्थान भी अपने आप में अलग ढंग से  किया गया था .

                         बस कुछ कुर्सियां और एक सोफा  दूल्हा और दुल्हन के लिए रखा गया था .
यहाँ पर शादी दो अलग अलग धर्म से  जुड़े लोगों के  हो रही थी लेकिन इसमें ऐसा कुछ भी नहीं था कि जिसे कट्टरता के साथ जोड़ा जा सके . इसमें दोनों ही परिवारों के विशाल हृदयता का परिचय मिल रहा था बल्कि कहूं अली का परिवार हमारे साथ जुड़ कर हमें ही अनुग्रहित कर रहा था क्योकि उन्होंने हमारी हर रस्म को उतना ही मान दिया जितना की हम देते हैं और वो रस्में उनके अनुसार शायद नहीं होती है . हाँ अगर कुछ नहीं था तो हमारे अनुसार वहां कोई पंडित नहीं था और उनके अनुसार कोई मौलवी या निकाह संपन्न करवाने वाला व्यक्ति नहीं था .
                     वहां कार्य स्थल पर सिर्फ दोनों परिवारों के प्रमुख लोग ही थे और उनकी उपस्थिति में ही कार्य सम्पादित हुआ .
                  बरात आने पर हमने उस बारात का दिल से स्वागत किया और उनको समुचित स्थान पर बिठाया गया . कुछ ऐसा दृश्य था वहां ---

                                         वर के माता -पिता , वर वधु एवं वधु के माता -पिता


                       
                     शादी का आरम्भ तो अब होना था . सबसे पहले कन्यादान की रस्म हुई लेकिन यहाँ कन्या वर के हाथ नहीं सौंपी गयी बल्कि कन्या के माता - पिता ने कन्या को वर के माता -पिता को उनकी बेटी के रूप में सौप दिया और फिर वर के माता - पिता ने वर को बेटे के रूप में कन्या के माता - पिता कोसौंप  दिया  और फिर दोनों का स्थान बदल कर बिठा दिया गया . एक अलग सा विचार उठा मन में वाकई अगर दोनों परिवार बहू न समझ कर बेटी समझ कर स्वीकार करने लगें तो शायद समाज में हो रहे महिला उत्पीडन को एक विराम न सही कुछ अंकुश तो लगाया ही जा सकता है . दामाद भी बेटे के रूप में परिवार के साथ व्यवहार करे नहीं तो मैंने दामादों का नाटक कई घरों में देखा है . बेटा बन कर अधिक  प्रिय बना जा सकता है .

                    कन्यादान के बाद रस्म  हुई जयमाल की . सभी विवाहों की तरह इसमें भी वर और वधु  एक दूसरे को जयमाल पहनाई . जब कि ये रस्म अली के परिवार लिए बहुत सामान्य नहीं ही होती है . लेकिन  हमारी परम्पराओं और रस्मों को पूरा सम्मान दिया गया . और उसके बाद सिन्दूर दान जो सिर्फ और सिर्फ हिन्दू धर्म में ही मान्यता प्राप्त एक वधु के लिए सबसे जरूरी रस्म होती है उसको सम्पन्न किया गया . वर ने वधु की मांग में सिन्दूर भरा और हमारी परंपरा के अनुसार ये विवाह की सबसे महत्वपूर्ण रस्म भी मानी जाती है . जो जीवन भर उसको एक अलग स्थान प्रदान करती है . उसके बाद मंगलसूत्र पहनने की रस्म भी अली ने पूरी की . इन सब के बाद वर और वधु का चित्र जयमाल , सिन्दूर दान और मंगलसूत्र के पहनने का साक्षी बना हुआ है . 
                      

                   इसके बाद अली के परिवार के अनुसार बधावन की रस्म पूरी की गयी जिसमें वर पक्ष ने वधु को उपहार आदि प्रदान किये और बिहारी परंपरा के अनुसार चुमावन की रस्म भी पूरी की गयी जिसमें सुहागन महिलायें कन्या को सिन्दूर लगा कर आशीर्वाद देती हैं और वर को अक्षत का विभिन्न स्थानों पर स्पर्श करते हुए उसके सर पर अक्षत छिड़क कर आशीष देती है .  इसकी एक छवि भी देख लें . 
             

हाँ इस विवाह में सिर्फ दो काम नहीं हुए - एक तो अली के परिवार की परंपरा के अनुसार निकाह नहीं हुआ और हमारी परंपरा के अनुसार सात फेरे नहीं लिए गए . इस विवाह में कोई मौलवी या कोई पंडित उपस्थित नहीं था . हाँ इन सारी  रस्मों के बाद शादी का कानूनीतौर पर पंजीकरण हुआ . वहां पर रजिस्ट्रार के प्रतिनिधि उपस्थित थे और गवाह के तौर पर अली के पक्ष से उनके छोटे भाई और पिता ने साइन किये और विधा की और से उसकी बहन और पिता ने . शादी को वैधता भी प्राप्त हो गयी .   उसके बाद कुछ ख़ुशी के पलों को दिल से ख़ुशी छलकते हुए पल में विधा और उनकी सासु मान फातिमा मेहता नृत्य करती हुईं .फातिमा जी ने सफेद साड़ी के साथ लाल ब्लाउज और माथे पर बड़ी सी लाल बिंदी और जूड़े  में लाल फूलों के गजरे से सजा कर अपने को हमारे रंग में ही रंग डाला था  जो हम सबको बहुत ही अच्छा लग रहा था .


इन सब से अलग एक और चीज थी यहाँ की विवाह की समस्त रस्मों के पूरा होने के बाद सूफी संगीत का कार्यक्रम रखा गया था . जिसमें प्रसिद्द सूफी गायक ने एक से एक बढ़कर सूफी गीत गाकर माहौल को बहुत ही खुशनुमा बना दिया था .  
फिर वाही जो सब मौकों पर होता है डिनर का प्रोग्राम , जिसमें सभी ने देर रात तक सब तरीके के व्यंजनों का लुफ्त उठाया और वर और कन्या को ढेरों आशीष देते हुए अपने अपने घर को विदा हो गए और कन्या को उसके ससुराल के लिए रवाना  कर दिया . इन मंगल कामनाओं के साथ  की ये नव दंपत्ति सदैव फलते फूलते रहें और खुशियाँ उनके दरवाजे पर हर सुबह सूरज की किरणों के साथ दस्तक दें .  
                                      

22 टिप्‍पणियां:

  1. var vadhu ko shubhkamnayen aur badhai :)

    achchha laga kuchh alag sa vyah :)

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  2. वाकई एक मिसाल है विशाल हृदयता और सदाशयता का .
    God Bless them

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  3. अलग सी शादी..वाह
    वर वधु को शुभकामनायें.

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  4. वाह यह तो बड़ी अनोखी और भव्य शादी है मज़ा आया पोस्ट पढ़कर वर वधु को हार्दिक शुभकामनायें ...

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  5. एक नई पहल के लिए दोनो परिवारों का अभिनन्दन ,वर-वधू को हार्दिक शुभकामनाएँ !
    - हे ईश्वर वे बिना फ़तवों के प्रहार खाये आजीवन शान्ति-सुख से रहें !

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  6. wah bahut khoob rahi yeh shadi .do alag alag sanskaaro ,tahzeebo ka milan .The Club bahut hi khoobsurat place hain .maine waha attend ki thee apni sis-in-law ki beti ki shaadi so bhavyata ko samjh pa rahi hun ..nav vivahit jode ko shaadi ki shubhkamnaye

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  7. वाह बहुत खूब ......सबकी खुशियाँ यूँ ही कायम रहें ...नए जोड़े को शुभ-आशीष

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  8. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(8-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  9. वाह दी..सचमुच बड़ी अनोखी शादी थी. लेकिन अभी मन भरा नहीं. एक पोस्ट और लिखिये और खूब सारी तस्वीरें पोस्ट कीजिये ..

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  10. दीदी,धन्‍यवाद नहीं कहूंगा। हम खुद नहीं लिख सकते।

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  11. सच में यह एक अनूठी शादी रही। वर-वधू को हमारी हार्दिक शुभकामनाएं।

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  12. इसे पढ़ कर मुझे तो लग रहा है कि मैं शादी में शरीक हो गया था सब मेरी आँखों के सामने है. हाँ एक और बात ऐसा अगर सरे देश में हो जाए तो क्या पूछना कल ही हमारा भारत विकसित हो जायेगा क्योंकि लोगों को लड़ने का बहाना ही नही मिलेगा. अजय जी आपका धन्यवाद आप इस एक अच्छे पिता है.

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  13. इसे पढ़ कर मुझे तो लग रहा है कि मैं शादी में शरीक हो गया था शुभकामना...

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  14. मंगलवार 18/06/2013 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं ....
    आपके सुझावों का स्वागत है ....
    धन्यवाद !!

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  15. बहुत ही खूबसूरती से शादी का वर्णन किया है आपने...सचमुच अनोखी शादी थी यह.
    और इसी बहाने हम भी मिल लिए....बहुत अच्छा लगा आप से बिटिया से और भाई साहब से मिलकर. अच्छा समय गुज़ारा हमने.
    अगली बार ज़रा और समय लेकर आइये मुंबई...फिर साथ में घूमेंगे :)

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    1. हाँ , रश्मि वाकई बहुत अच्छे पल हमने गुजारे और नवनीत जी और बच्चो से मिल कर बहुत अच्छा लगा . तुम कानपूर आओ .

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  16. भारत एक है ,वर वधु को शुभकामनाएं
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post पिता
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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  17. सुन्दर लाजवाब प्रस्तुति
    वर-वधू को हमारी और से भी हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  18. "Sahsa Pani Ki Ek Boond Ke Liye" Bahut Hi Achhi Shaadi. Padhe Love Story, प्यार की बात aur bhi Bahut kuch online.

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  19. एक बार फिर सबकुछ आँखों के सामने से गुजर गया। आभार। आप लोगों के आने से सबकुछ सुहावना हो गया था।

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ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जो मन में होता है आपसे उजागर कर देते हैं. आपकी राय , आलोचना और समालोचना मेरा मार्गदर्शन और त्रुटियों को सुधारने का सबसे बड़ा रास्ताहै.