बुधवार, 12 जून 2013

बाल श्रमिक दिवस !


          
                ये बचपन जो भूखा है और ये बचपन जिंसकी भूख  किसी और को मिटानी चाहिए अपने नन्हें नन्हें हाथों से काम कर असहाय माता - पिता  भूख मिटाने के लिए काम  कर रहे हैं और कहीं कहीं तो नाकारा बाप के अत्याचारों से तंग आकर उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी . 
                मैं अपनी बहन के यहाँ गयी तो उसकी सास ने कहा - कोई लड़की काम करने के लिए आपके जानकारी में हो तो बताना . घर में रखना है कोई तकलीफ नहीं होगी , घर वालों को हर महीने पैसे भेजती रहूंगी . क्या कहती उनसे ? उनकी बहू और बेटियां बहुत नाजुक है कि  वह अपने बच्चों को तक नहीं संभाल  सकती हैं और घर के काम के लिए उन्हें कोई बच्ची चाहिए क्योंकि उसको डरा धमका कर काम करवाया जा सकता है और अगर बाहर  की होगी तो उसके कहीं जाने का सवाल भी नहीं रहेगा . 
                ये घरेलु काम करने वालों का हाल है . होटलों , ठेकों , भट्ठों और भवन निर्माण में ऐसे बच्चे काम करे हुए देखे जा सकते हैं और वे नन्हे हाथ कितनी तेजी से काम करते हैं ? यहाँ मुफ्त शिक्षा भी क्यों नहीं ले पा  रहे हैं ये बच्चे ? क्योंकि माँ बाप को दो पैसे कमा कर लाने वाले बच्चे चाहिए जिससे खर्च में हाथ बंटा सके . माँ बीमार हो तो बेटी काम करके आएगी . स्कूल जाने पर क्या मिलेगा? 

                  इनके लिए सरकारी नीतियां तो हैं लेकिन उन नीतियों को लागू करवाने के लिए जिम्मेदार लोग शोषण करने वालों से ही पैसे खाकर सब कुछ  नजर अन्दाज करके कागजों में खाना पूरी करते रहते हैं . घर में काम करने वाली कम उम्र लड़कियाँ अक्सर यौन शोषण का शिकार होती हैं और वे अपनी मजबूरी के कारण  कुछ कह नहीं पाती हैं . 
           होटलों में मुंह अँधेरे से उठ कर काम करते हुए बच्चे और आधी रात  तक होटल बंद होने तक काम करते रहते हैं और खाने को क्या मिलता है ? बचा हुए खाना या नाश्ता . वहीँ से वह कभी कभी अपराधों में भी लिप्त हो जाते हैं . ढाबे और सड़क किनारे बने हुए चाय के होटल तो ऐसे बच्चों को ही रखते हैं ताकि उन्हें कम पैसों में अधिक काम करने वाले हाथ मिल सकें . 

             आज के दिन इन बच्चों को कोई छुट्टी देने वाला भी नहीं होगा . वे बिचारे क्या जाने इस लोकतान्त्रिक देश में उनको पढ़ने लिखने और और बच्चों की तरह से खेलने का पूरा अधिकार है . हम इस दिन को मना कर और कुछ लिख कर अपने दिल में तसल्ली कर लेते हैं कि  हमारा फर्ज पूरा हो गया लेकिन हम भी उतने ही दोषी है क्योंकि कहीं भी काम करते हुए बच्चों से काम लेने वालों को समझाने का काम करने का प्रयास तो कर सकते हैं . ये भी निश्चित है की जिन्हें ये मुफ्त में काम करने वाले मिले हैं वह हमें भाषण और कहीं जगर दीजिये कह कर वहां से चले जाने के लिए मजबूर कर देंगे . लेकिन प्रयास तो कर ही सकते हैं कहीं कोई एक बच्चा भी माँ बाप के समझने से , मालिक कों  समझाने से उसके बचपन को बचाने   में सफल हो सके तो आज का दिन सार्थक समझेंगे .  

*सभी चित्र गूगल के साभार  

7 टिप्‍पणियां:

  1. इस समस्या का एक और पक्ष है .साधनहीन होते हुये भी जो लोग संतान उत्पन्न करते चले जाते हैं और उससे मज़दूरी करा कर अपना काम चलाते हैं उन पर भी नियंत्रण होना चाहिये .

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  2. आपकी यह प्रस्तुति कल चर्चा मंच पर है
    धन्यवाद

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  3. बहुत सही बात कही है आपने . आभार रुखसार-ए-सत्ता ने तुम्हें बीमार किया है . आप भी दें अपना मत सूरज पंचोली दंड के भागी .नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN क्या क़र्ज़ अदा कर पाओगे?

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  4. साएर्थक चिंतन ...
    काश बच्चे अपने बचपन को महसूस कर सकें और उसे जी सकें ..

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  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन रक्तदान है महादान - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  6. म श्री एडम्स केविन, Aiico बीमा ऋण ऋण कम्पनी को एक प्रतिनिधि हुँ तपाईं व्यापार को लागि व्यक्तिगत ऋण चाहिन्छ? तुरुन्तै आफ्नो ऋण स्थानान्तरण दस्तावेज संग अगाडी बढन adams.credi@gmail.com: हामी तपाईं रुचि हो भने यो इमेल मा हामीलाई सम्पर्क, 3% ब्याज दर मा ऋण दिन

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ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जो मन में होता है आपसे उजागर कर देते हैं. आपकी राय , आलोचना और समालोचना मेरा मार्गदर्शन और त्रुटियों को सुधारने का सबसे बड़ा रास्ताहै.