गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

विश्व स्वास्थ्य दिवस!








आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। स्वास्थ्य तो मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी नियामत है। आज जब कि मिलावट और प्राकृतिक संसाधनों में भी छेड़छाड़ कर खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो रहे है तो इन विसंगतियों से कैसे बचा जा सकता है? कोई भी चीज ऐसी नहीं कि जिसे स्वास्थ्य की दृष्टि से सही मानकर उपयोग किया जा सके।
फिर भी हम अगर कुछ नहीं कर सकते हैं तो कम से कम इस बात की सतर्कता तो बरत ही सकते हैं कि जिन चीजों से हम भिज्ञ है कि इनसे ये बीमारी या परेशानी पनप सकती है तो इससे बचाव तो किया ही जा सकता है। इन स्थितियों से कितने लोग परिचित है ये तो मैं नहीं जानती , हाँ इतना जरूर है बचपन में भी ऐसी बातों से लोग परिचित थे। मैंने अपने बचपन में भी सुना था कि कच्ची फूल गोभी खाने से आदमी बहरा हो जाता है और मुझे वह बहुत पसंद थी। चुपचाप खाया करती और फिर श्रवण शक्ति का परीक्षण भी करती रहती। माँ को इस बारे में कितना पता था और वह क्यों रोकती थी ऐसा कभी हमने पूछा ही नहीं।
आज जब कि कुछ तथ्यों कि जानकारी हो चुकी है तो सबसे बाँट लेना जरूरी समझा। ये चर्चा निरर्थक नहीं है -- सार्थक है और हममें से शायद ६० प्रतिशत लोग इससे परिचित नहीं है और अगर है तो भी पार्टी में चाउमीन बड़े प्रेम से खाते हैं, सलाद तो सभी लोग लेते हैं। बगैर ये जाने कि पता नहीं कौन सी चीज किस बीमारी को न्योता दे सकती है?
इसका एक उदाहरण अभी हाल ही में सामने आया । मेरे एक परिचित स्कूटर चलाते हुए एक खड़े हुए ट्रक में जाकर टकरा गए और बेहोश हो गए। उनके हाथ कि हड्डी टूट चुकी थी। उनको ये नहीं मालूम हुआ कि वे कैसे टकरा गए? घर वालों को ये पता था कि वे भांग खाते हैं तो सबको क्रोध था कि क्यों ऐसा करते हैं? लेकिन बाद में पता चला कि कि उनके दिमाग में कुछ कीड़े प्रवेश कर गए हैं और उनके ही प्रकोप से उनको बेहोशी स्कूटर चलाते हुई आई और वे ट्रक से टकरा गए।
ये कीड़े कहाँ और किन पदार्थों में पाए जाते हैं ये चर्चा का विषय है ताकि उनके बारे में सावधानी बरती जा सके।
ये हैं -- बंद गोभी, पालक, मूली की जड़ और पत्ते दोनों , फूल गोभी, खीरा आदि। ये सभी चीजें कच्ची भी प्रयोग में लाई जाती हैं और पकी हुई भी। जिनमें मूली और खीरा तो कच्चा ही अधिकतर खाया जाता है। खीरे के छिलके और मूली के छिलके तथा पत्तों में ये कीड़े पाए जाते हैं। इसके लिए कभी भी खीरा और मूली बगैर छीले नहीं खाने चाहिए। मूली और पालक के पत्तों का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद ही खाने के लिए प्रयोग करें। कहीं ऐसा न हो कि हम जिन विटामिन और खनिज के लिए इनको खा रहे हैं वे हमारे अन्दर कुछ और न पनपा दें। पत्ता गोभी, मूली के पत्ते और बंद गोभी के कच्चे स्वरूप को अधिकतर चाट और नूडल या चाउमीन के साथ प्रयोग किया जाता है। बाजार में या पार्टी में तो बिल्कुल भी इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता है।
पत्ता गोभी कच्चा बहुत पौष्टिक मना जाता है अक्सर इसको घर में भी सलाद या रायते के साथ प्रयोग करते हैं लेकिन ये सबसे अधिक घातक है। इसके प्रयोग करने से पहले इसको अच्छे से गरम पानी में नमक डाल कर उसमें पांच मिनट के लिए डाल कर रखे और इसके बाद पानी निथार कर प्रयोग करें तो अधिक सुरक्षित होगा। सब्जी में पकाने के बाद ये कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
क्या करते हैं ये कीड़े:
ये कीड़े सीधे अगर मष्तिष्क में पहुँच गए तो फिर ये वहाँ की रक्त वाहिनियों में अपना अधिकार कर लेते हैं । उनको ब्लाक कर सकते हैं, उनको निष्क्रिय भी कर सकते हैं। मष्तिष्क में इनकी संख्या बढ़ने लगती है। ऐसी स्थिति में ब्रेन स्ट्रोक, पक्षाघात या फिर मिर्गी जैसी स्थिति भी आ सकती है। समय रहते पता चलने पर इसका इलाज संभव होता है।
अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रही और इसके सतर्कता बरते इतना ही काफी है।

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी पोस्ट एक बार पढने से काम नहीं चलेगा..एक बार अपने बच्चों को भी सुनानी पड़ेगी.....बहुत लाभकारी पोस्ट, आभार...

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  2. जागरूक करती और सार्थक आलेख .

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  3. बहुत उत्तम जानकारी..आभार.

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  4. जागरूक करती सार्थक और अच्छी पोस्ट.

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  5. बहुत अच्छी जानकारी मिली ...अच्छी पोस्ट ..आभार

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  6. लिएंडर पेस को बेन स्ट्रोक का दुआर पड़ने पर इस बीमारी के बारे में जाना था ...
    अभी और विस्तार से इसके कारणों को जाना ...
    उपयोगी जानकारी !

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  7. बहुत अच्छी जानकारी !
    बहुत अच्छी पोस्ट ..आभार !

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