गुरुवार, 2 मई 2013

विश्व जल संकट !

                       


पानी चाहिए और एक नल 
                पानी मानव जीवन की सबसे बड़ी  जरूरत है जिसे वह प्रकृति से लेने के लिए बाध्य है किन्तु अब शायद वह अपने को इतना समर्थ समझने लगा है कि विशेषज्ञों की चेतावनी , प्रकृति के संकेत के बाद भी भू जल दोहन से बाज नहीं आता है. वह तो हमें धरती के गर्भ से मिलेगा ही लेकिन उसको प्रदूषित करने में हम जो भूमिका निभा रहे हैं कि  गंगा , यमुना , गोमती किसी भी बड़ी नदी को देख लें - क्या उनका पानी पीने की बात तो दूर नहाने के काबिल तक बचा है . इसके जिम्मेदार हम ही हैं - बगलें झांक कर हम अगर कहना  चाहें कि ये  तो उनका काम है , जिनके पास रहने को घर नहीं और जो अपने काम इन स्रोतों से ही चलाते हैं . हम तो नदी में कपडे धोने नहीं जाते , हम तो नहरों में नहाने नहीं जाते फिर हम क्यों ? 
                      वैसे भी समरथ  को नहि दोष गुसाईं  - दोष तो उनका है जो सड़क पर लगे नालों पर अपनी अपनी बाल्टियों और डिब्बों की क़तार लगा कर घंटों खड़े रहते हैं और तब उनको पानी नसीब होता है. हम घरों में बैठ कर सबमर्सिबल लगा कर तेज धार पानी को यूं ही चला देते हैं और ऊपर रखी टंकी भरने के बाद भी वह कितनी देर तक बहता रहता है क्योंकि हम उसको चला कर भूल जाते है . वह पानी नालियों में चला जाता है . हमारे कूलर कितना पानी पी जाते हैं क्योंकि हमें कुछ तो ठंडक में रहने का हक है.  
                      अब जब कि  धरती के अन्दर का पानी भी बड़ी बड़ी फैक्ट्री और टेनरियों से निकले रासायनिक पदार्थों के समाने  से प्रदूषित हो चुका  है . जब इनके चलते गंगा भी एक गन्दा  नाला बन कर रह गयी है. हमें पीने के लायक पानी कहाँ से मिलेगा ? इसी पानी के पीने से , नहाने से कितने संक्रमण और चर्म रोगों से लोग ग्रसित हो रहे हैं क्योंकि उनके पास पानी प्राप्त करने के साधन सीमित और यही बचे है . 
                        हम घर में वाटर प्यूरीफायर लगा चुके हैं क्योंकि हमें प्रदूषित पानी पीने से कोई बीमारी न हो जाए क्योंकि अधिकतर संक्रमण दूषित पानी के कारण  ही होते है . लेकिन हम कभी इस विषय में नहीं सोच पाए कि  एक लीटर आर ओ से निकले हुए पानी से तीन लीटर प्रदूषित पानी नाली में बह जाता है . वैसे तो मैंने भी इस तरफ काफी दिन तक ध्यान नहीं दिया लेकिन पिछले दिनों  से मैं उस पानी को नापने की सोची और उस ट्यूब को एक बाल्टी में डाल  दिया तब पता चला कि  उससे एक लीटर पानी लेने पर तीन लीटर पानी बह जाता है . मेरे अनुमान से करीब पचास प्रतिशत आबादी किसी न किसी तरीके से इसको प्रयोग कर रही है तो हम कितना पानी बहा भी रहे हैं और कुछ लोग गन्दा बदबूदार पीने के लिए मजबूर है . 
                        फिर क्या सोचा आपने  इस पानी की बर्बादी को रोकने के लिए - वही मेरी तरह से उस पानी को एक बाल्टी में संचित कर लीजिये और अगर अपने गमले रखे हुए हैं तो उसमें डालने के लिए सीधे नल का पानी न डाल  कर इस पानी को डाल  कर उसका सदुपयोग कर सकते है . उससे घर की धुलाई के लिए प्रयोग कर सकते हैं . लेकिन उस पानी को यूँ ही नाली में मत बहने दीजिए . ये अवश्य है कि  इसके लिए आपको कुछ तो प्रयास करने होंगे . कहाँ कहाँ हम पानी को बहाने से रोक सकते हैं इस पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि अगर कभी हम ऐसे हालत में फँस जाते हैं तो हमें अपने घर के इस बहते हुए पानी की बहुत याद आती है .
                        हालत पर गौर कीजिये और फिर सोचिए कि अगर एक इंसान इस पर ध्यान दे और इसके प्रति जागरूक हो तो फिर कितने  लीटर पानी का सदुपयोग हो सकता है. कृपया ध्यान दें और भविष्य में आने वाले जल संकट से विश्व को बचाने में अपना सहयोग करें . .

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (03-05-2013) के "चमकती थी ये आँखें" (चर्चा मंच-1233) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. एक और बात- वर्षा का सारा पानी बेकार बह जाता है,इमारतों में यह व्यवस्था आवश्यक होनी चाहिये कि उसे ठीक से संचित किया जाये!

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  3. आगे क्या होगा ...सोचकर ही डर लगता है |

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  4. जहाँ तक हो सकता था, पानी सोख लिया गया है। पानी के लेकर त्राहि त्राहि मचने लगी है।

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