बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

क्या फेसबुक से ब्लॉग पर सक्रियता कम हो रही है ?

              जिसे मैं महसूस कर  हूँ , उसे और भी हमारे साथी भी महसूस कर  हैं लेकिन महसूस करने से कुछ नहीं होता।  कुछ  इस  तरह से सोचा जाय कि  जो हम खोते जा रहे हैं,  उसके अस्तित्व को उसी तरह से जारी  रखें।
                      अरे अभी  शेष है मुद्दे पर आना।   ब्लॉगिंग के ऊपर फेसबुक ने डाका डाल  दिया है और ब्लोगर्स भी ब्लॉग के बजाय फेसबुक पर जाकर स्टेटस अपडेट कर देते हैं, वह भी कुछ ही पंक्तियों में और पढ़ने वाले भी उसको लाइक करके अपने फर्ज से मुक्त हो जाते हैं।  ये अवश्य है कि फेसबुक पर डाली हुई चीज करीब करीब उस हर इंसान की नजर से गुजर जाती है जो ऑनलाइन होता है बल्कि कहिये कि  फेसबुक पर सिर्फ वे लोग पढ़ सकते हैं जो आपके मित्रों में शामिल है  और अगर कुछ घंटों में इतने स्टेटस अपडेट  हो जाते हैं कि जो आगे बढ़ जाते हैं , उनको पढ़  पाना संभव नहीं हो पाता है और ब्लॉग की अपडेट उन्हें  तब ही मिलती है जब वे किसी भी  संकलक  पर जाएँ .  जहाँ पर उन्हें ताजे अपडेट मिलें। लेकिन किसी भी समस्या और विषय को ब्लॉग पर डालने से जितने सहज ढंग से उसको प्रस्तुत किया जा सकता है  फेसबुक पर अगर करें भी तो सारे लोग सारे अपडेट नहीं पढ़ पाते हैं और महत्वपूर्ण विषयों से वंचित रह जाते है।  ब्लॉग पर विषय  संचित और सुरक्षित रहते हैं और उसको  पढ़ने के लिए और उसे कहीं भी उल्लिखित करने के लिए कभी भी जोड़ा जा सकता है जब कि हम फेसबुक के साथ ऐसा नहीं कर पाते  हैं।


                      मैं खुद भी कुछ  ब्लॉग पर  रही हूँ लेकिन जब अपने से जुड़े ब्लॉग पर  नजर डाली तो पाया कि राजभाषा ब्लॉग जिस पर मैं भी कभी बहुत सक्रियता से लिखती थी और वह मुझे बहुत पसंद भी है, लेकिन उसकी आखिरी पोस्ट अप्रैल की पड़ी हुई थी तो मुझे लगा कि फेसबुक जैसी सोशल साईट ही ब्लॉग के प्रति ब्लॉगर की सक्रियता को कम करने लगी है।  हो सकता है कि वहम हो लेकिन सबसे इस पर विचार लेकर कुछ जाना तो जा ही सकता है।  इसी लिए आप सबको एक विषय पर अपने विचार लिखने का अनुरोध किया। जैसे जैसे विचार मिल रहे हैं ,   सबको प्रस्तुत  कर रही हूँ।  आप भी अपने विचार भेजें। 



आपने बिलकुल सही बात उठाई है, पर बात सिर्फ फेसबुक की नहीं है मेरे दृष्टिकोण से  …. लोग कुछ भी लिखने लगे हैं, और कुछ भी लिखे पर कमेंट्स देकर कमेंट्स की आशा रखते हैं और आशा पूरी भी होती है  …। इससे सही लिखनेवाले कमेंट्स से निर्विकार हो गए हैं और इस पर नज़र डालना ज़रूरी है ! 
ब्लॉगर अपने लिंक्स फेसबुक पर देते हैं ताकि आप पढ़ें - पर एक क्षण में लाइक बटन दबानेवाले नहीं समझते कि सही मायनों में लिखनेवाले इससे प्रभावित नहीं होते  . 
हमारे चाहने से कुछ नहीं होगा,क्योंकि जो पढ़ते हैं वे आज भी पढ़ते हैं - और जब प्रभावित होते हैं तो प्रतिक्रिया भी देते हैं - और कई बार समय,मानसिक स्थिति स्तब्ध भी बना देती है  . कमेंट्स के साथ seen  का भी चिन्ह है,जो बताता है कि कितनों ने पढ़ा हमें ! 
हम न जबरदस्ती किसी को पढने के लिए कह सकते हैं,न कमेंट्स देने को - खुद पर विश्वास मायने रखती है

 रश्मि प्रभा


आपका सोच सही हैं ब्लोग्स पर लिखा हर कोई नही पढता   वह  सबकी नजरो में आभी जाए तो यही होता हैं कि आप मेरे ब्लॉग पर आये तभी हम आपके ब्लॉग पर आयेंगे  .कम से कम मुझे तो यही लगता हैं   फेस बुक पर आप जितना भी अच्छा लिख ले हर कोई कमेंट नही करता  बस चलते चलते लाइक कर लेता हैं .मैंने देखा कई बार लोग पूरी पोस्ट पढ़ते भी नही हैं .....ब्लॉग अभिव्यक्ति का उत्तम माध्यम हैं और संजीदा भी   ,परन्तु क्षमा चाहती हूँ मैं भी ब्लोग्स पर सक्रीय होने की कोशिश करती हूँ परन्तु जितना होना चाहिए उतना नही हो पाती शायद मैं नवोदित हूँ इस क्षेत्र में इस लिय ...... हाँ आश्वासन देती हूँ मैं अपनी तरफ से कि अब से कम से कम रोजाना ब्लॉग का अवलोकन अवश्य करूंगी शुक्रिया आपने इस तरह ध्यान दि

 नीलिमा शर्मा




मुझे नहीं लगता कि फेसबुक से ब्लोगिंग पर कोई फर्क पड़ रहा है। बल्कि फेसबुक त्वरित गति से ब्लॉग पर ट्रेफिक बढ़ाने मे सहायता ही करता है। ब्लॉग और फेसबुक दोनों अभिव्यक्ति का माध्यम है और एक दूसरे  के पूरक हैं अलग नहीं। यह हम पर निर्भर है कि किस तरह इन दोनों माध्यम का प्रयोग करते हैं।
रही बात कमेंट्स की तो कमेंट्स आने से ज़्यादा महत्व इस बात का है कि जो हमने लिखा उसे कितने लोगों ने पढ़ा और इसका हिसाब ब्लॉग की statistics से आसानी चल सकता है।
फेसबुक ब्लॉग पर लगभग 70-80% ट्रेफिक बढ़ाता ही है इससे ब्लॉग को कोई खतरा नहीं है .


  यशवंत माथुर

समय और परिस्थिति सब नियंत्रित करती है.,मुझे जब जैसा समय मिलता है सक्रीय रहती हूँ,वैसे मेरा कार्य नए blogs खोजकर पढ़ना ही है...एक अच्छी पहल है .. राय जानने की
आभार

 अर्चना चावजी
 मेरे विचार इस मामले में कुछ भिन्न हैं. ब्लॉगस कोई नहीं पढता ऐसा नहीं है. अब भी अच्छे ब्लॉगस पढ़े जाते हैं. हाँ इतना अवश्य है कि अब ब्लॉग अपनी प्राकृतिक अवस्था में आ गया है. बीच में, चाहे किसी रेटिंग की वजह से हो या किसी और वजह से. हर कोई ब्लॉग लिखता नहीं था, बहुत से लोग ब्लॉग ठेला करते थे. रोज का रोज ठेलना, फिर चाहे वह किसी मेल से कॉपी पेस्ट किया हुआ मटेरियल हो या फिर आपस में दो लोगों की लड़ाई, गाली गलोच और भड़ास. अब वह सब छट कर फेसबुक पर चला गया है. ब्लॉग अब वही लिखता है जिसके पास वाकई कुछ लिखने या अभिव्यक्त करने को है. और तभी लिखता है जब उसका मन लिखने का हो, न कि रोज लिखना है कि तर्ज़ पर कुछ भी लिख दिया जाए.
फेसबुक पूरी दुनिया से जुड़ने का एक माध्यम है इससे इनकार नहीं किया जा सकता और वहां जब आप किसी ब्लॉग का लिंक देते हैं तो वह पूरी दुनिया के सामने होता है. यह सच है कि उसपर कुछ लोग बिना देखे ही लाइक क्लिक कर देते हैं, पर यह भी सच है कि उसे देखकर गंभीर पाठक भी ब्लॉग तक आता है और आपके ब्लॉग की रीडरशिप बढ़ती है. 
गंभीर लेखन आज भी ब्लॉग पर होता है और गंभीर पाठक आज भी उसे पढता है. ब्लॉग की अहमियत आज भी कम नहीं हुई है.
हाँ हलकी फुलकी बातों और टिप्पणियों के लिए फेसबुक बुरा नहीं.

शिखा वार्ष्णेय ,


मैं भी इस बात से सहमत हूँ कि फेसबुक की वजह से पूरा ब्लॉग-जगत इस बात से झूझ रहा है ...यहाँ आने वाले पाठकों की संख्या में कमी आई है ..और फेसबुक के स्टेट्स पर सिर्फ लाइक कर देते से इती-श्री कर देना लिखने और पढ़ने वालो पर सारा सर वार है ..वहाँ का लिखा हुआ इतनी जल्दी खो जाता है कि फिर से उसे खोजने में बहुत वक्त लगता है ....पर फेसबुक से पहचान मिलती है और मिली है इस बात को भी नाकारा नहीं जा सकता |

मेरे जैसे बहुत से लोग है जो वहाँ बहुत सक्रिय नहीं है ...हम लोगों के ब्लॉग या वेब साइड अपने पाठक ढूढं रही है |नीलिमा की बात सही है ..बिना कॉमंट किये कोई भी अपने ब्लॉग पर नहीं आता |सच में कुछ वक्त से सभी ब्लॉग अपने अपने पाठकों के लिए तरस रहें हैं और आगे चल के हालात और भी बुरे होने वाले हैं ...मुझे नहीं लगता कि वो वक्त फिर से आएगा जब सब लोग ब्लॉग लिख भी रहें थे और पढ़ भी रहें थे |

अंजू चौधरी

                                                                                                                     (  क्रमशः)

21 टिप्‍पणियां:

  1. ये हम अपने लिहाज से देखते समझते हैं। एक खास समय पर खास सक्रियता होती है। फिर नई चीज कुछ समय के लिए ज्यादा आकर्षित करती है। ब्लॉग का विकल्प फेसबुक, ट्विटर नहीं हो सकता न है। सिर्फ चाय नाश्ते या खाने के पहले के सूप जैसा है।

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  2. मुझे ऐसा नहीं लगता कि ब्लॉग तक पहुँचने वाले पाठकों की संख्या पर फेसबुक को लेकर कोई फर्क पड़ता हो और मुझे ऐसा भी नहीं लगता कि ब्लॉग पोस्ट के लिंक फेसबुक पर साझा करनें से फेसबुक पाठक ब्लॉग तक पहुँचते हो क्योंकि फेसबुक पाठक उन लिंकों को वहीँ पर लाइक का चटका लगा कर अपनें कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं ! इसलिए मुझे ब्लॉग पर आने वाले पाठकों पर फेसबुक का कोई असर नजर नहीं आता है ! हाँ एक बात सच है और वो यह है कि हम खुद ही इधर से उधर हो जाते हैं ,ब्लॉग पर रहते हैं तो ब्लॉग पर लगातार सक्रीय रहते हैं और जब फेसबुक का रुख करते हैं तो उधर रम जाते हैं और तब ब्लॉगिंग को भूल जाते हैं !!

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  3. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 17-10-2013 को
    चर्चा मंच
    पर है ।
    कृपया पधारें
    आभार

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  4. फेसबुक या ट्विटर तुरंत उपजने वाले लघु विचार साझा करने का उपयुक्त माध्यम है। ब्लॉगिंग समय और विचारों का सतत प्रवाह है , दोनों माध्यमों की अपनी उपयोगिता है।
    ब्लॉगिंग में आरोप -प्रत्यारोप , झगडे -झंझट वाली पोस्ट की आवृति कम हुई है , गंभीर पाठक आज भी पढ़ते हैं !

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  5. फ़ेसबुक के आने का फ़ायदा यह हुआ कि ब्लॉग को अब गंभीर अभिव्यक्ति का माध्यम माना जाने लगा! :)

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  6. हम न जबरदस्ती किसी को पढने के लिए कह सकते हैं,न कमेंट्स देने को - खुद पर विश्वास मायने रखता है लेखन सशक्‍त हो तो पढ़ने के लिये स्‍वयं प्रेरित करता है ....

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  7. अच्छा लगा सबके विचार जानके ... मुझे तो लगता है की यदि किसी एक माध्यम से भी पूरी तरह जुड़ सकें तो ये अपने आप में बहुत है ... मैंने तो अभी तक फेसबुक पे खाता भी नहीं खोला ...

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  8. फेसबुक ने निश्चित रूपसे रूप से ब्लॉग लेखन को प्रभावित किया है, जिसके कई कारण है! मगर दोनों साथ साथ चलते रहेगें!

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  10. आप की इस पोस्ट को निविया की नजर से http://hindibloggerscaupala.blogspot.com/शुक्रवार में शामिल किया गया हैं , कृपया अवलोकनार्थ पधारे

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  11. जिनकी जैसी प्यास है, उन्हे वैसा ही माध्यम रास आता है। ब्लॉग गहरे से प्यास बुझाता है।

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  12. आज की बुलेटिन अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

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  13. जब परिवर्तन आता है तो उसके बहुत सारे कारण होते हैं। लेकिन लेखन में लेखक को उसके विचार मजबूर कर देते हैं लिखने के लिए। इसलिए जो वास्‍तव में लेखक है वह ब्‍लाग पर ही लिखेगा। प्रारम्‍भ में लेखक बनने की चाह में बहुत सारे लोग ब्‍लाग से जुड़ गए थे लेकिन फिर निरन्‍तरता नहीं रख पाए और वे फेसबुक पर चले गए। इसलिए ब्‍लागजगत में लेखन में कमी आयी है। यदि विमर्श बिना पूर्वाग्रह के होगा तब सार्थक होगा, लेकिन आज राजनैतिक पूर्वाग्रह से लिखने वाले बहुत हैं इसलिए भी कुछ लोग दूर हो गए हैं।

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  14. रेखा दी ......सलाम है आपकी सोच को जो आप सबको साथ लेकर चलती हैं ...

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  15. बहुत ही अच्छी और प्रासंगिक पोस्ट लिखी है आपने. आपने इस विषय पर अन्य लोगों के विचार भी लिखे हैं इस से यह चर्चा बहुत उपयोगी हो गयी है. फेसबुक और ब्लॉग दोनों का अपना अलग-अलग महत्व है. यह बात सही है कि नयी चीजें आने से लोगों की रुचियों में भी परिवर्तन होता है. यही बात फेसबुक और ब्लॉग के साथ भी है. आपकी चर्चा उच्च कोटि की है.
    आपका ब्लॉग पढ़ कर बहुत ख़ुशी हुई.

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  16. मेरा मानना है कि फेसबुक पर आज इतनी अनावश्यक सामाग्री, विकृति मानसिकता की भरमार है कि एक अच्छा लेखक कोई लेख या काव्य लिखने से पहले यह सोचता है कि उसके इस सामाग्री का भविष्य क्या होगा! या वह भीड़ मेँ खो जायेगा, या उसे कॉपी करके अपने नाम से पेस्ट करने वाले उक्त सामाग्री का दुरुपयोग करेँगे। इस सबका कारण एक है कि फेसबुक पर इतने अंजान लोग भरे पड़े हैँ कि किसी चीज को चुराना नियमो का उल्लंघन करना आदि उनके लिए आम बात है। अत: अच्छे लोगो के लिए ब्लॉग पर आज भी लिखना चाहिए जिसे फेसबुक पर बार-बार Share करके ब्लॉग की सक्रियता भी बढ़ा सकते हैँ। ब्लॉग एक का तात्पर्य शुद्ध व सार्थक लेख जबकी फेसबुक व ट्वीटर केवल एक संदेश या बात कहने का माध्यम मात्र है। चाहे कितने भी अच्छे लेख लिखे जाये, फेसबुक पर लिखने से वो वो सन्तुष्टि नहीँ मिलती जो कि ब्लॉग पर मिलती है।

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ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जो मन में होता है आपसे उजागर कर देते हैं. आपकी राय , आलोचना और समालोचना मेरा मार्गदर्शन और त्रुटियों को सुधारने का सबसे बड़ा रास्ताहै.