गुरुवार, 12 जनवरी 2012

अल्पसंख्यक कब तक?

चुनावी हथकंडों में अल्पसंख्यक आरक्षण के लाभ से वंचित दल आयोग के प्रतिबन्ध से तिलमिला उठे लेकिन इसको तो होना ही हैचुनाव आयोग कब तक इस पर अंकुश लगा पायेगा लेकिन इन दलों ने जो लालीपाप समाज में अल्पसंख्यक को दिखा दिया है क्या उससे उनके मतदान पर प्रभाव नहीं पड़ेगा? इस का लाभ सभी दल उठाने की फिराक में हैइस बात की घोषणा करीब करीब सभी दल कर चुके हें
इस 'अल्पसंख्यक ' शब्द जो संविधान में आज से ६३ वर्ष पहले परिभाषित किया गया था वह अब पूरी तरह से बदल चुका हैउस समय भारत के विभाजन के बाद जिन्हें अल्पसंख्यक घोषित किया गया थाआज वे पूरी तरह से समर्थ हें, शिक्षित है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक भीआज इतने वर्ष बाद उन्हें अल्पसंख्यक कहा जाता है जब कि इसका एक सीधा सा उदाहरण में दे सकती हूँ - जहाँ मैं रहती हूँपी डब्लू डी हाऊसिंग सोसायटी में कुछ ही मकान बने हुए थे और उस समय यहाँ पर सिर्फ - परिवार ही रहते थे लेकिन आज उन के अतिरिक्त यहाँ १५० परिवार रह रहे हेंउनकी आबादी का एक नमूना हैमैं यह नहीं कहती कि ये नहीं होना चाहिए , जब इंसान है तो उसके परिवार बढ़ेंगे ही लेकिन जिस गति से इस देश की आबादी बढती चली जा रही है उसके देखते हुए यहाँ पर अल्पसंख्यक अब अल्पसंख्यक नहीं रहे हेंजनगणना कल इस बात का प्रमाण होगी क्योंकि यहाँ पर अब अल्पसंख्यक की सीमा में आने वाले लोगों का पुनर्परीक्षण होना चाहिएआरक्षण के नाम से सभी की आखों में चमक जाती है क्योंकि उन्हें प्लेट में परोस कर सुविधाएँ जो डी जा रही हें और इससे उनके आगे बढ़ाने के प्रति लालसा का अंत हो जाता है क्योंकि उनको ये पता है कि उनकी आबादी को देखते हुए सभी दल उनका लाभ उठाने के लिए रास्ते खोज रहे हें

7 टिप्‍पणियां:

  1. राजनीति की बाध्यताओं से हटकर समाज निर्माण हो..

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  2. हम जैसों को अल्पसंख्यक में आने में ज्यादा देर नहीं .. आरक्षण के नाम पर राजनीती की जाती है ..सार्थक मुद्दा उठाया है

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  3. ये सब चुनाव के समय मतदाताओं को लुभाने के तरीके हैं....

    आपकी बातों से सहमत।

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  4. एक बार अच्छा और सच्चा लेख

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  5. सार्थक मुद्दा...
    हम तो इन्तज़ार में हैं कि अल्पसंख्यकों में आ जाएँ और भला हो जाये हमारी भी आने वाली पीढ़ियों का!!!!!!!!!!!!!!!!!!

    सादर.

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