गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

चुनौती जिन्दगी की:संघर्ष भरे वे दिन (३)




अतुल श्रीवास्तव

संघर्ष की परिभाषा सबकी नजर में अलग अलग होती है और वे पल जिन्दगी में कभी भी हो सकते हेंअपने तरह से सब उसे बयान करते हेंअतुल जी की संघर्ष गाथा कुछ इस प्रकार से हें:


जिद थी, अपनी मरजी से शादी करना है। लडकी भी पसंद कर ली थी। अपने ही कालेज की। अपने ड्रामा ग्रुप में शामिल। घर से इजाजत मिलने की कोई उम्‍मीद नहीं थी पर फिर भी डर नहीं था, नौकरी जो थी। यह वो दौर था जब दुनियादारी की कोई चिंता नहीं थी। डर भी था, इतनी बडी जिम्‍मेदारी कैसे उठा पाऊंगा.... फिर एक दिन फैसला ले ही लिया और पहुंच गये आर्य समाज। वहां शादी हुई... पर जैसा कि अंदेशा था, घर में बवंडर मचेगा...सो मचा। पिता का फरमान कि अब मेरे घर मत आना... बस फिर क्‍या था, निकल चले अपनी अलग राह। मां दुनिया में नहीं थी, जो ढाल बनती। वो तो उस वक्‍त छोड कर चली गई थी जब मैं महज चार साल का था। इसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष। किराए का मकान और घर की दालरोटी का जुगाड। दोनों ने मिलकर तकलीफें देखीं और धीरे धीरे सब कुछ संभलने लगा कि शादी के छह महीने बाद ही एक बडा एक्‍सीडेंट हो गया। पत्‍नी गंभीर अवस्‍था में अस्‍पताल में थी और मैं उसके सिरहाने। एक्‍सीडेंट की खबर से पिता कुछ नरम हुए और उन्‍होंने इसी हाल में पहली बार मेरी पत्‍नी को देखा। करीब दो महीने पत्‍नी अस्‍पताल में रही..... इस दौरान घर का काम और नौकरी दोनों मेरे ही जिम्‍मे थी। खैर वक्‍त बीत ही जाता है, बुरा हो या अच्‍छा। ये वक्‍त भी बीत गया और इसके बाद सब सामान्‍य होने लगा।

करीब छह साल बाद हमारे घर ‘देवी’ आई। मेरी बेटी। काफी सारी खुशियां लेकर वो आई। अब मेरे परिवार और मेरी पत्‍नी के परिवार में हम स्‍वीकार्य हो गए हैं पर मन में इच्‍छा थी कि खुद की अपनी दुनिया बसाएंगे.... सो अलग रह रहे हैं..... जीवन में काफी कुछ पाया है और काफी कुछ खोया भी है, कहते हैं, जीवन चलने का नाम है.... सो चल रहे हैं अब जिंदगी में एक ही ख्‍वाहिश है कि खुद का घर हो..... बस।

10 टिप्‍पणियां:

  1. घर की चाह भी पूरी होगी- शुभकामनायें

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  2. atul jee,

    jo himmat karta hai vah saphal bhi hota hai, sangharsh se harana jeevan nahin hai aur jo than liya vah hua aage bhi hoga meri yahi duaa hai.

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  3. nahin janati ki tippani mere comment box men kyon nahin aa rahi hain lekin mail par thee rashmi prabha jee ka comment so daal rahi hoon.

    रश्मि प्रभा... ने आपकी पोस्ट " चुनौती जिन्दगी की:संघर्ष भरे वे दिन (३) " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    घर की चाह भी पूरी होगी- शुभकामनायें

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  4. ईश्वर आपकी चाह जल्द से जल्द पूरी करे।

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  5. जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबह शाम :) यही तो ज़िंदगी के वो मज़े और अनुभव हैं जो आपको जीवन मे हमेशा आगे पढ़ते रहने की प्रेरणा देते हैं आपके अपने घर की चाह भी ज़रूर पूरी होगी शुभकामनायें...

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  6. Pallavi ने आपकी पोस्ट " चुनौती जिन्दगी की:संघर्ष भरे वे दिन (३) " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबह शाम :) यही तो ज़िंदगी के वो मज़े और अनुभव हैं जो आपको जीवन मे हमेशा आगे पढ़ते रहने की प्रेरणा देते हैं आपके अपने घर की चाह भी ज़रूर पूरी होगी शुभकामनायें...

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  7. अतुल सर शादी को लेकर आपकी समस्या हल हो गई वैसे
    हि घर कि भी समस्या जल्द हि सुलझ जायेगी ...भगवान से यही
    प्रार्थना है ..हरपल आपके जीवन में खुशिया आए...
    --

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  8. रेखा जी मेरी भावनाओं को आपने स्‍थान दिया इसके लिए आभार और आप सबका शुक्रिया। आप सबकी दुआओं से ही कुछ कर गुजरने का हौसला मिलेगा।

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  9. अतुल जी हमारी यही पार्थना है आपकी समस्या जल्द हि सुलझ जायेगी

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  10. अतुल जी ....अगर मन में ठान ही लिया हैं तो ....वो ऊपर वाला जिसने अभी तक साथ दिया हैं ....आगे भी ऐसे ही आप दोनों का हाथ थामे चलेगा ...बस विश्वास की डोर थामे ...चलते चलो ....शुभ आशीष

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