बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन (८)

मुकेश कुमार सिन्हा

रास्ते जिन्दगी के सुगम तो नहीं होते लेकिन कभी वो सिर्फ कांटे ही कांटे दिखलाता है और कभी डूब से भरी जमीन सुखद अहसास लिए होता है और कभी उससे उतरते ही काँटों की चुभन भी अनुभव होती हैफिर भी हम जीते हें और हर पल को उतनी ही शिद्दत से जीते हेंऐसे पलों से दो चार होते रहे मुकेश कुमार सिन्हा के अनुभव प्रस्तुत हें


जिंदगी के सफ़र में आगे बढ़ते गए, बहुत सारी रुकावट आयी.....सिर्फ आयी ही नहीं, आज भी साथ ही है......संघर्ष! देखा ही नहीं, अनुभव किया... जिंदगी के हर पल.. !! रेखा दी ने कहा, अपने कुछ उस खास पल के लिए लिखो जिसको तुम समझते हो, उस रुकावट को तुम्हें बहुत बेहतर ढंग से पार किया हो, पर शायद मुझे ऐसा कुछ नहीं दिख रहा जो लगे कि सिर्फ इस पल में मैंने जिंदगी को जलते देखा हो, सच कहता हूँ.. आज तक ऐसा कभी भी नहीं आया, जब मुझे लगा हो............. क्या मस्त जिंदगी है.... हर कुछ दिनों बाद कुछ न कुछ बड़ी सी कठिनाई मुह बाये खड़ी हो जाती है... बेशक ये अलग बात है, उस से लड़ने कि आदमी इच्छा कहूँ या भगवान कि दी हुई ताकत... जो कठिनाई आते ही अपने आप उड़ भी जाती है ... मुझे नहीं लगता ये कभी कम होगा.... ये आगे भी जारी रहेगा ...

पर अगर पीछे मुड़ के देखता हूँ तो लगता है , बहुत कुछ पाया मैंने... ये अलग बात है कि वो जो पाया वो अपने परिवार और दोस्तों का सिर्फ प्यार है..!
शुरू की जिंदगी खुबसूरत थी, मेरा बचपन अपने दादा दादी के प्यार में पला बढ़ा, वो सरकारी मुलाजिम थे, और अपने साथ ही मुझे रखा, मैंने दादी में ही माँ को पाया, उसको मैया कहता था... फिर धीरे धीरे बचपन से आगे बढे... छः भाई बहनों में सबसे बड़ा हूँ, और मेरे पिताजी के पास कोई खास नौकरी भी नहीं ...जो थी वो भी बराबर बदलती रही... मेट्रिक के बाद से ही मैं आर्थिक रूप से खुद पे निर्भर रहा, पहले टूयुशन, प्राइवेट स्कूल में अध्यापन का कार्य, फिर दुकानदारी, एक छोटी सी फैक्ट्री में उनके account का काम, medical representative , insurance consultant , नॉन-बैंकिंग सहारा इंडिया में मैंने लगातार दस साल तक field जॉब में रहा....... सामान्यतः एक माध्यम वर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखने वाले लोग आर्थिक बदहाली के कारण सिर्फ अय्यासी वाली जिंदगी जी नहीं पाते, पर हमने अपने आर्थिक बदहाली के कारण जीने कि सबसे अहम् जरुरत खाना में कमी भी देखा है.... फिर आदमी जब मुश्किल हालातों से गुजरता है तो धीरे धीरे उसकी आदत हो जाती है... ......... और जब आदत होने लगी तो अंत में नौकरी मिल गयी...:)
फिर एक एक छोटे से शहर का छोरा दिल्ली पहुँच गया...और सबसे पहले पोस्टिंग मिली अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधान मंत्री कार्यालय में ..फिर मनमोहन सिंह के साथ. उनके मातहत में रहे... फिर कृषि मंत्रालय में स्थानांतरण हुआ और फिर अब ..कृषि राज्य मंत्री के साथ सम्बद्ध है...| धीरे धीरे जिंदगी संवरती गयी... पर कठिनाइयों से मेरा चोली दामन का सम्बन्ध रहा... शादी करके आये तो सोचा तो ... बहुत सारी खुशियाँ देंगे.. पर कुछ दिनों में अक्ल ठिकाने आ गए, किराये के मकान में जब बेड तक नहीं था... मुझे याद है, हम उस समय टी.वी. लेना चाहते थे.. पर दूकानदार consumer loan देने को तैयार नहीं था, क्योंकि मेरी पोस्टिंग प्रधानमंत्री कार्यालय में थी, उन्हें लगता था.. हम नहीं लौटाए तो वो क्या कर लेंगे...!!, फिर जिंदगी पटरे में आने लगी तो मेरे से दस साल छोटे भाई का दोनों किडनी ख़राब हो गया... ! उसके लिए transplant अब कैसे और किस तरह हुआ ये अलग बात है..| fir अपनी दीदी को अपने सामने आँख मूंदते हुए देखा... अनुभव किया.... | २०१० में अपने शादी के वर्षगांठ के दिन ही अपने हाथ और पैर दोनों तुडवा लिए.. !! अब आप ही बताओ, कैसे कहूँ कि कोई खास पल था, जब मैंने कठिनाई के सबसे उच्च स्तर को झेला हो... .. और भी बहुत सारी रुकावटें आयी, और आज भी कुछ न कुछ लगा रहता है... पर जिंदगी है तो दर्द है... और दर्द को दूर करने कि कोशिश भी जारी है.......


जिंदगी के सफ़र में आगे बढ़ते गए, बहुत सारी रुकावट आयी.....सिर्फ आयी ही नहीं, आज भी साथ ही है......संघर्ष! देखा ही नहीं, अनुभव किया... जिंदगी के हर पल.. !! रेखा दी ने कहा, अपने कुछ उस खास पल के लिए लिखो जिसको तुम समझते हो, उस रुकावट को तुम्हें बहुत बेहतर ढंग से पार किया हो, पर शायद मुझे ऐसा कुछ नहीं दिख रहा जो लगे कि सिर्फ इस पल में मैंने जिंदगी को जलते देखा हो, सच कहता हूँ.. आज तक ऐसा कभी भी नहीं आया, जब मुझे लगा हो............. क्या मस्त जिंदगी है.... हर कुछ दिनों बाद कुछ कुछ बड़ी सी कठिनाई मुह बाये खड़ी हो जाती है... बेशक ये अलग बात है, उस से लड़ने कि आदमी इच्छा कहूँ या भगवान कि दी हुई ताकत... जो कठिनाई आते ही अपने आप उड़ भी जाती है ... मुझे नहीं लगता ये कभी कम होगा.... ये आगे भी जारी रहेगा ...

पर अगर पीछे मुड़ के देखता हूँ तो लगता है , बहुत कुछ पाया मैंने... ये अलग बात है कि वो जो पाया वो अपने परिवार और दोस्तों का सिर्फ प्यार है..!
शुरू की जिंदगी खुबसूरत थी, मेरा बचपन अपने दादा दादी के प्यार में पला बढ़ा, वो सरकारी मुलाजिम थे, और अपने साथ ही मुझे रखा, मैंने दादी में ही माँ को पाया, उसको मैया कहता था... फिर धीरे धीरे बचपन से आगे बढे... छः भाई बहनों में सबसे बड़ा हूँ, और मेरे पिताजी के पास कोई खास नौकरी भी नहीं ...जो थी वो भी बराबर बदलती रही... मेट्रिक के बाद से ही मैं आर्थिक रूप से खुद पे निर्भर रहा, पहले टूयुशन, प्राइवेट स्कूल में अध्यापन का कार्य, फिर दुकानदारी, एक छोटी सी फैक्ट्री में उनके account का काम, medical representative , insurance consultant , नॉन-बैंकिंग सहारा इंडिया में मैंने लगातार दस साल तक field जॉब में रहा....... सामान्यतः एक माध्यम वर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखने वाले लोग आर्थिक बदहाली के कारण सिर्फ अय्यासी वाली जिंदगी जी नहीं पाते, पर हमने अपने आर्थिक बदहाली के कारण जीने कि सबसे अहम् जरुरत खाना में कमी भी देखा है.... फिर आदमी जब मुश्किल हालातों से गुजरता है तो धीरे धीरे उसकी आदत हो जाती है... ......... और जब आदत होने लगी तो अंत में नौकरी मिल गयी...:)
फिर एक एक छोटे से शहर का छोरा दिल्ली पहुँच गया...और सबसे पहले पोस्टिंग मिली अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधान मंत्री कार्यालय में ..फिर मनमोहन सिंह के साथ. उनके मातहत में रहे... फिर कृषि मंत्रालय में स्थानांतरण हुआ और फिर अब ..कृषि राज्य मंत्री के साथ सम्बद्ध है...| धीरे धीरे जिंदगी संवरती गयी... पर कठिनाइयों से मेरा चोली दामन का सम्बन्ध रहा... शादी करके आये तो सोचा तो ... बहुत सारी खुशियाँ देंगे.. पर कुछ दिनों में अक्ल ठिकाने गए, किराये के मकान में जब बेड तक नहीं था... मुझे याद है, हम उस समय टी.वी. लेना चाहते थे.. पर दूकानदार consumer loan देने को तैयार नहीं था, क्योंकि मेरी पोस्टिंग प्रधानमंत्री कार्यालय में थी, उन्हें लगता था.. हम नहीं लौटाए तो वो क्या कर लेंगे...!!, फिर जिंदगी पटरे में आने लगी तो मेरे से दस साल छोटे भाई का दोनों किडनी ख़राब हो गया... ! उसके लिए transplant अब कैसे और किस तरह हुआ ये अलग बात है..| fir अपनी दीदी को अपने सामने आँख मूंदते हुए देखा... अनुभव किया.... | २०१० में अपने शादी के वर्षगांठ के दिन ही अपने हाथ और पैर दोनों तुडवा लिए.. !! अब आप ही बताओ, कैसे कहूँ कि कोई खास पल था, जब मैंने कठिनाई के सबसे उच्च स्तर को झेला हो... .. और भी बहुत सारी रुकावटें आयी, और आज भी कुछ कुछ लगा रहता है... पर जिंदगी है तो दर्द है... और दर्द को दूर करने कि कोशिश भी जारी है.......

16 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा जी आप यहाँ भी शामिल है भईया जी :)संघर्ष किसकी ज़िंदगी में नहीं होते... बस सामना करते हुए आगे बढ़ने की हिम्मत होनी चाहिए जो आप में भरपूर है। :)शुभकामनायें....

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  2. संघर्ष सदा ही निखारता है, आपको भविष्य की उज्जवल शुभकामनायें।

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  3. जिंदगी हर कदम एक नई जंग है..आपको सुखद भविष्य के लिए शुभकामनायें.

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  4. संघर्ष मांजता है ... मुकेश से मिलकर ही लगा . संघर्ष तो मुस्कानों में भी झलकता है

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  5. पोस्ट एक साथ दो बार एक ही पन्ने पर है, ठीक कर लें

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  6. lagta hai rekha di ne dard ka kuchh jayda hi tadka lagane ke liye post ko 2-3 baar kar diya..ehehehheheheh:)))

    thanx!! di:)

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  7. संघर्ष ही जीवन हैं ...पर मुकेश तुम्हारे मुस्कुराते रहने की आदत ही तुम्हारी ताकत हैं ...ऐसे ही रहना हर वक्त ..दोस्त

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  8. संधर्ष ही व्यक्ति को आगे बढ़ने को प्रेरित करता हैं ..और हम जिन्दगी को अच्छी तरह से महसूस कर पाते हैं ...हमारी जिन्दगी शायद भगवान ने कुछ अलग ही बनाई हैं ..इसलिए तो कठिनाईयां आती रहती हैं और हम उसका मुकाबला करते रहते हैं ...यह कठिनाईया ही तो जीवन की परीक्षा हैं ..

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  9. तुमने इतने संधर्ष देखे और तुम कुंदन बन गए दोस्त ....इसी तरह खुश रहना ..मेरे कुंदन लाल सिन्हा हा हा हा हा हा

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  10. तपने पर ही कुंदन निखरता है...शुभकामनायें !

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  11. हर पल संघर्ष है ..किसी का कम किसी का ज्यादा ... इतने संघर्ष के बाद भी चेहरा मुस्कान भरा हो तो जीवन साधना लगने लगता है ... शुभकामनायें

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  12. सही है, जिंदगी है तो दर्द है और दर्द से जंग हमेशा जारी रहनी चाहिए।

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  13. Duniya Me Haqiqat Ka Pata Kuch Nahi
    Ilzam Hazaro H Khataa Kuch aNhi
    Meri Zindgi Mei Kya Ha Padh Na Sakoge
    Bas Ashqo Ke Daag Ha Aur Likha Kuch Nahi...BHUT HI UMDA OR MUJE NAZ HAI KI ME AAP DOST HU ....KATHINAYI MENE BHI BHUT SHI HAI LEKIN AAP SE KUM ...AAKHYE NUM HOGYI ...AB AAP KI ZINDGYI ME SUKH HI SUKH AAYE ESI BHAGVAN SE PRATHANA....AAMINE

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  14. Mukesh,
    zindagi mein sukh dukh dono aate hain, shayad dukh isliye taaki sukh ki ahmiyat hum samajh sakein. yun hi muskurate rahiye, har dukh ke baad sukh ka aana tay hai. shubhkaamnaayen.

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  15. संधर्ष ही तो जीवन की परीक्षा हैं ..

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  16. sangharsh karte hue insaan himmat rakhna aur sangharsh karne ki kala achhe se seekh jata hai.. use chhoti motee pareshaniyaan jeevan main pareshan nahin kar paati'n.. meri bhagwan se prarthana hai ki aapki himmat aur housle ko banaye rakhe .aur aapke jeevan main aane wala har pal sukhdaayi ho.

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ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जो मन में होता है आपसे उजागर कर देते हैं. आपकी राय , आलोचना और समालोचना मेरा मार्गदर्शन और त्रुटियों को सुधारने का सबसे बड़ा रास्ताहै.