शुक्रवार, 30 मई 2014

माँ तुझे सलाम ! (14)

                                 माँ हर इंसान की एक ही होती है , वह होती है एक आम औरत जो अपने जीवन में तमाम रिश्ते और नामों को लेकर चलती रहती है लेकिन जो माँ का रूप होता है वह सबसे अनमोल - जिसका रिश्ता अपने बच्चे के अपने गर्भ में पालने का एक अहसास होता है जिसका दर्द उसे अपने से अधिक भरी लगता है।  वह बाँट चाहे न पाये लेकिन उसकी ममता से भरा हाथ जब सर पर रखा होता है तो लगता है की कोई है मेरे ऊपर जो मेरे लिए दुआ करता है और उसके रहने तक मेरी हर मुसीबत उसकी बन कर मेरे लिए हलकी हो जाती है।   इसी लिए कह  रहे हैं - वो होते हैं किस्मत वाले जिनके माँ होती है : एस एम मासूम।





इंसान को उन मुहब्बतों की कद्र कम हुआ करती है जो उन्हें मिलती रहती है इसलिए यदि माँ की मुहब्बत किसी कहते हैं वो हम जैसे उन लोगों से पूछिए जिनकी माँ अब दुनिया में नहीं रही |हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के ज़माने में दो औरतें अपने कुछ माह के बच्चों को साथ लिए जंगल से गुज़र रही थीं कि एक भेड़ीया आया और एक औरत के बच्चा को छीन कर भाग गया। थोड़ी देर के बाद उस औरत के दिल में ख़्याल आया कि ये दूसरी औरत का बच्चा मैं ले लूं। ये सोच कर इसने झगड़ा शुरू कर दिया की भेदिया जिसे ले गया वो तेरा बच्चा था मेरा नहीं । बात  हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम तक पहुंचा। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया छुरी लाओ, में इस बच्चे के दो टुकड़े करके दोनों  में आधा आधा बाँट  देता हूँ। इन में से जब एक ने ये फ़ैसला सुना तो वो कहने लगी ठीक है, लेकिन जब दूसरी ने सुना तो रोना शुरू कर दिया और कहने लगी मेरे बच्चे के टुकड़े ना किए जाएं, बल्कि इसे  दूसरी औरत को दे दिया जाये, कम अज़ कम मेरा बच्चा ज़िंदा तो रहेगा। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम समझ गए कि ये बच्चा उसी औरत का है, लिहाज़ा आप ने उसे अता फ़र्मा दिया। इसे कहते हैं माँ की मुहब्बत |इसी लिए नबियों और इमाम् के कथन हैं की जिसकी माँ दुनिया में नहीं उसे अपने क़दम सभाल के रखना चाहिए क्यूँ की अब सच्चे दिल से उसके लिए दुआ करने वाला कोई दुनिया में नहीं है |
 
माता जी का देहांत हुए ५ साल बीत गए | अभी कल की ही बात तो लगती है की जब भी दिल परेशान हुआ कोई चिंता हुयी माँ की  गोद में सर रख के कह दिया और ऐसा करते ही लगता था जैसे सारी परेशानी दूर हो गयी और नयी ताक़त सी महसूस करता था |मैं अक्सर एक घर की तस्वीर जब देखो तब अपने लेख के साथ डालता और लोगों को दिखाता  रहता हूँ जिसमे मैंने अपने जीवन के 21 साल गुज़ारे | यह बहुत कम लोग जानते हैं की मुझे उस घर से प्रेम इसलिए है क्यूँ की उसी घर में बचपन से जवानी गुजरी और हर दौर में माँ का प्यार साथ रहा | जब भी उस घर को देखता हूँ तो कभी वो जगह याद आती है जहां माँ लोरियां सुनाती थी, कभी वो जगह याद आती है जहां मुझे पढ़ाती थी , कभी वो जगह याद आती है जब मैं बहुत बीमार पड़ा था तो माँ  रातों में जाग जाग के सर में पट्टियाँ रखती थी, दुआएँ किया करती थी और उस समय मुझे ऐसा लगता था की यह केवल माँ की दुआएँ हैं जो मुझे ठीक कर देंगी |
 
मुझे आज भी याद है जब एक बार मेरा एक्सिडेंट हो गया था और डॉ ने कहा इसका हाथ काटना पड़ेगा | मुझे आज भी याद है माँ का वो चेहरा जिसपे अजीब सी परेशानी और बेबसी सी झलके लगी थी और डॉ से कहती जाती क्या कोई रास्ता नहीं है की इसका हाथ ठीक हो जाये ? दो तीन डॉ से बात करने पे एक डॉ के खतरा मोल लिया और आश्वाशन दिया की ठीक हो सकता है और जब ऑपरेशन कामयाब हुआ तो माँ ख़ुशी के मारे रोने लगी |आज मेरे दोनों हाथ सही सलामत है और ये माँ के नहीं मेरे काम आ रहे हैं जिनको बचाने के लिए माँ इधर उधर  दौड़ी  थी ,इसे कहते हैं सच्ची मुहब्बत |
 
ऐसे ही एक बार झाड़ियों में जामुन जमा करते समय मेरे पैर में कुछ ठंडा ठंडा लगा और कट गया | लोगों से सुना था सांप ठंडा होता है , बचपना था माँ को जा के कह दिया माँ लगता है सांप ने का लिया | बस फिर क्या था डॉ बुलाया गया, नीम के पत्ते आये , इंजेक्शन लगा , लोगों ने कहा सोने मत देना | कुछ देर तक तो यह सब चलता रहा धीरे धीरे रत गहरी होती गयी डॉ और आस पास के लोग चले गए मैं भी सोने लगा लेकिन माँ की आँखों में नींद कहाँ | मुझे ज़रा सी झपकी आई की जगा देती थी और रात भर नहीं सोयी |सुबह जब डॉ आया और उसने कहा की कुछ नहीं सब ठीक है तब कहीं जा के माँ ने आराम किया |
 
कहाँ मिलती है ऐसी मुहब्बत जो माँ दे गयी ? जवानी आई तो ज़िन्दगी बेपरवाह हो गयी अब उसकी बातें पुराने समय की बातें लगती थीं कभी कभी बहस भी कर जाता था | माँ गुस्सा दिखाती थी बात नहीं करती थी | लेकिन गुस्से में जब सो जाता तो अक्सर माँ का हाथ  अपने सर  पे महसूस करता | मैं सब समझता था और अक्सर तो ऐसा होता की मैं जब  गुस्सा होता तो सोने का बहाना कर के माँ का इंतज़ार करता था अब आएगी अब सर सहलाएगी | अधिकतर माँ  मुझे ही जीतने देती थी और मेरी बात मान लेती थी | पढाई ख़त्म हुयी नौकरी मिली फिर शादी हुयी मैं बड़ा होता गया लेकिन जब भी परेशान हुआ माँ के पास जा पहुँचता और अंदर छुपा एक बच्चा बाहर आ जाता | दुनिया वालों के सामने बड़ा बनने वाला हर इंसान अपने माता पिता के सामने खुद को बच्चा ही महसूस किया करता है |
 
फिर एक दिन खबर आई माँ का देहांत हो गया बहुत देर तक यकीन ही नहीं हुआ की जो माँ मेरे जीवन  का एक ऐसा  हिस्सा थी जिसके बिना जीने की मैं सोंच भी नहीं  सकता था वो अब नहीं रही और अचानक ऐसा महसूस हुआ मैं इस दुनिया में एक दम तनहा रह गया | अब मुश्किलों में किसकी गोद में सर रख के आंसू बहाऊंगा ? कौन मेरी परेशानी में मेरे लिए दुआएँ मांगेगा ? लेकिन सत्य को स्वीकार करना पड़ा | आज भी जब जब मैं परेशान होता हूँ तो सर पे अपनी माँ के सहलाते हाथों  को महसूस करता हूँ |
 
मैं अपने इस लेख के ज़रिये हर उस इंसान से जिसकी माँ जीवित है यही कहना  चाहूँगा जितनी मुहब्बत माँ से कर सकते हो करो क्यूँ की जिस दिन इसकी आँखें बंद हुयी तुम दुनिया में अकेले रह जाओगे और यह मुहब्बत फिर कभी नहीं पा सकोगे | 

10 टिप्‍पणियां:

  1. माँ ही लड़ जाती है अपनी संतान के लिए हर किसी से !
    नमन !

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन खुशियाँ दो, खुशियाँ लो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. पहले सुनी थी ये कहानी पर आज दुबारा पढ कर माँ याद आ गई।
    वह जब हमें डांटती तो यही कहती कि तुम मुझे बेशक बुरा समझो पर मैं चाहूंगी कि लोग तुम्हे बुरा न कहें वरन् अच्छा कहें।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (31-05-2014) को "पीर पिघलती है" (चर्चा मंच-1629) पर भी होगी!
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. maa ki yad yesi hi pyari hoti hai...apne bachhon ke liye
    to wo sabhi se jujh jati hai....

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  6. माँ तो उस भगवान से भी पूजनीय है

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  7. माँ पूज्यनीय है ... भावुक कर गयी आपकी पोस्ट ..

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  8. बेहद भावप्रवण संस्मरण अपूर्णीय क्षति

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ये मेरा सरोकार है, इस समाज , देश और विश्व के साथ . जो मन में होता है आपसे उजागर कर देते हैं. आपकी राय , आलोचना और समालोचना मेरा मार्गदर्शन और त्रुटियों को सुधारने का सबसे बड़ा रास्ताहै.