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गुरुवार, 14 मई 2026

मां तुम्हें सलाम!


 अपने अपने भाव और अपनी अपनी अभिव्यक्ति, मां जिसमें दुनिया बसती है और मां की दुनिया भी उसी में बसती है। कैसे कोई मां के चित्र को शब्दों में उकेरता है? एकदम वैसा ही जैसा मन पर अंकित है। आज कविता और ग़ज़ल की धनी  #सौम्या श्रीवास्तव की अभिव्यक्ति।


यूँ तो माँ के प्रति भावनाएं मात्र एक दिन की मोहताज नहीं हैं...लेकिन फिर भी जो भावनाएं मन में ही घुमड़ती रहती हैं ...आज उन्हें जताए बिना नहीं रहा गया...!!!


माँ.......

जो स्वयं जीवट बन गई ,

और....

मेरे साहस के पंखों को भी

अधिक प्रबल और सबल करती गई...!


माँ ...

जो ख़ुद जागती रही 

लेकिन 

जिसे हमेशा ये ध्यान रहा ,

कि मेरी नींद तो नहीं खुल गई ..!


माँ ...

जो मेरे लड़खड़ाने पर मुझे ,

आगे बढ़कर हँसते हुए थामती है ..!

माँ ...

जो मेरी मुस्कुराहट के पीछे छिपे

अनकहे से मेरे सारे दर्द जानती है ..!


माँ ...

जिसके स्पर्श/ अनुभूति मात्र से ,

एक अद्भुत शक्ति का आभास होता है...!

माँ ...

जिसके पास मेरी सारी खुशियों ,

और हर उदासी का हिसाब होता है...!


माँ ...

जो स्वयं एक योद्धा है ,

और ...

जो मुझे भी दुविधाओं से ,

निरंतर संघर्ष करना सिखाती है ..!

माँ ...

जो विषम परिस्थितियों में भी ,

मुझे शहंशाह जैसा अनुभव कराती है...!


माँ ...

एक व्यक्तित्व जो मेरे जीवन का ,

सबसे सुखमय स्नेहिल अनुभव है...!

माँ ...

जिसकी महत्ता और त्याग को

मात्र शब्दों में वर्णित करना ,

इस संपूर्ण सृष्टि को 

सीमाओं में बाँधने जितना असंभव है....!

सौम्य वर्षा 

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