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सोमवार, 7 सितंबर 2026

दास्तान -ए-MRI!

 अब बहुत दिन हो गए, काफी समस्याएं जल्दी शुरू हुई थी लो ब्लड प्रेशर से चक्कर आना। इससे ही समस्याएं बढ़ी।  1 2 3 4 डॉक्टर को दिखाया न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजिशियन, ई एन टी और फिर फिजिशियन। सबका ट्रीटमेंट चल रहा था, आखिर में MRI की सलाह दी गई।  मैं इस बला से बहुत डरती थी क्योंकि मुझे पता है कि मैंने सिर में बहुत चोटें खाईं हैं। बहुत डर लगता है कि कहीं  कुछ गड़बड़ी निश्चित रूप से निकलेगी, यद्यपि मेरे न्यूरो सर्जन ने कभी नहीं बताया और इस बार भी नहीं। इसकी मशीन से मुझे बहुत डर लगता है। उसके अंदर सिर डाल के स्कैनिंग होना मेरे लिए पहले से ही बहुत भयावह लगता था। फिर डॉक्टर ने जब बता ही दिया तो मैंने भी सोचा कि चढ़ जा बेटा सूली पर। कोई ट्यूमर होगा, कोई और चीज होगी। इसकी अतिरिक्त कोई भी विकल्प नहीं होगा।  जाते-जाते एमआरआई मशीन और मैं लेट गई।  पहले से सुन रखा था कि बहुत डरावनी आवाजें आती हैं । आंखें बिल्कुल बंद रखना। मैटल की कोई भी चीज नहीं होनी चाहिए।

       आखिर सिर उसके अंदर डाल दिया गया अपन अपनी आंखें बंद करके मन ही मन - 'दीनदयाल विरद संभारी .......।' का मानसिक जप कर रही थी। कोई हंसना नहीं, ये मेरी शक्ति है। 

      अब शुरू हुए बादल गर्जना, ढोल बजना और ता ता ता और पा पा पा पा पा । तीन बार ता ता और सात बार पा पा का जप। फिर ढोल नगाड़े। बहुत ज्यादा डर नहीं लगा जितना कि सिर डालने से पहले लग रहा था।

          और तारीफ की बात देखो कि कईयों बार चोट खाते सिर की रिपोर्ट इतनी बढ़िया कि नो प्रॉब्लम का टैग लगा कर हर एक्सपर्ट ने पास कर दिया। सबसे हंसी कि बात जब मैंने उसकी पिक्चर देखी तो किसी में गणेश जी, किसी में दुर्गा तो कहीं नृसिंह जी नजर आये। सब खूब हंस रहे थे और मैं इस तरफ से मस्त।