क्या हमारे लिए अपना संघर्ष ही हमेशा बड़ा लगता है लेकिन अगर हमने अपने संवेदनशील ह्रदय से आस पास के चरित्रों को ध्यान से देखें तो पता चलता है कि हम अपनी जिन्दगी में खुद को एक मनचाही जिन्दगी जीने के लिए संघर्ष करे या फिर कुछ लोगों को रोटियों और जीवन को चलाने के लिए किया जाने वाला संघर्ष बराबर अर्थ रखता है.
आज की प्रस्तुति है डॉक्टर रागिनी मिश्रा की .
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| रागिनी मिश्रा |
'सरिता'.....
शराबी पति द्वारा एकड़ो जमीन,घर-बार सब कुछ बर्बाद
कर दिए जाने के बाद भी उसने अपने घर-परिवार या किसी के भी सामने हाँथ नहीं
फैलाए बल्कि बीमार शराबी पति को लेकर शहर आकर इलाज़ कराने लगी। मायके से
भी मदद ना मिलने पर उसने हार ना मानी। अनपढ़ थी इसलिए दूसरे के घरों
में साफ़- सफाई और मालिश इत्यादि का काम करने लगी . सारा दिन हाड़तोड़
मेहनत उसने अपने पति का इलाज़ कराया। बच्चों का सरकारी स्कूल में नाम
लिखाया। अनपढ़ होने के बावजूद उसे इस बात का भान था कि अगर उसने
पढाई-लिखाई की होती तो उसकी आज यह दुर्दशा ना होती . इसलिए वह अपनी
लड़कियों को पढ़ाना चाहती थी। आज उसका पति भगवान् को प्यारा हो चुका है।
उसने अपनी दोनों बेटियों का विवाह एक
खाते-पीते घर में किया है। दोनों बेटियां खुश हैं। वह आज भी उतनी ही मेहनत
करती है कि उसने जो भी कर्ज अपनी बेटियों के विवाह में लिया था , उसे
चुका सके. मेहनती, शरीफ और सच्चाई की प्रतिमूर्ति ' सरिता' मेरे लिए हमेशा
ही एक आदर्श रहेगी।
.............................. ...........................डॉ रागिनी मिश्र .............................. ......

